18 साल से खराब किडनी के साथ जी रहे वृंदावन संत प्रेमानंद महाराज की प्रेरणादायक कहानी। डॉक्टर भी चकित हैं, जानिए उनका भक्ति से भरा जीवन।
एक ऐसा संत जिसने मौत को भी पीछे छोड़ दिया
आपने कई संतों की कहानियां सुनी होंगी, लेकिन वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्रीहित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज की जीवन गाथा आपको अंदर तक प्रेरित कर देगी।
कल्पना कीजिए — 18 से 20 साल से दोनों किडनी खराब होने के बावजूद, रोजाना डायलिसिस पर जीने के बावजूद, 56 साल की उम्र में भी वे हर दिन भक्ति और सेवा में सक्रिय हैं।
डॉक्टरों ने 17 साल पहले कहा था कि वे केवल 5 साल तक जीवित रह पाएंगे। लेकिन आज भी वे न केवल जीवित हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए जीवन का संदेश बन चुके हैं।
13 साल की उम्र में छोड़ा घर — भक्ति की शुरुआत
प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अखरी गांव (सरसोल ब्लॉक) में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है।
बचपन से ही वे भगवान और जीवन के सत्य को लेकर गहराई से सोचते थे। पांचवीं कक्षा में ही उन्होंने गीता प्रेस की श्री सुख सागर पढ़नी शुरू कर दी थी।
13 वर्ष की आयु में, उन्होंने परिवार और संसार का मोह छोड़ दिया और ब्रह्मचर्य का व्रत लिया। उस समय वे आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी नाम से जाने जाते थे।
वाराणसी में गंगा किनारे कठोर तपस्या
उनका अधिकांश साधना काल गंगा तट पर बीता। दिन में तीन बार स्नान, तुलसी घाट पर पीपल के नीचे ध्यान, और भिक्षा से जीवन यापन — यही दिनचर्या थी।
कभी भोजन न मिले तो वे सिर्फ गंगाजल पीकर सो जाते। ठंड, वर्षा, धूप — किसी भी परिस्थिति में उनका नियम नहीं टूटा।
वृंदावन आगमन — जीवन का टर्निंग पॉइंट
एक दिन बनारस में ध्यान करते हुए उन्हें श्री श्यामा-श्याम की कृपा से वृंदावन की महिमा का आभास हुआ।
वृंदावन पहुंचकर उन्होंने श्री रासलीला देखी, और श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं से गहराई से प्रभावित हुए।
यह अनुभव उनके जीवन का निर्णायक मोड़ था — वही दिन था जब उन्होंने अपने जीवन को राधा-कृष्ण की भक्ति को समर्पित कर दिया।
गुरु की सेवा और राधा वल्लभ संप्रदाय में दीक्षा
उनके गुरु संत श्रीहित गौरांगी शरण महाराज हैं। महाराज जी ने अपने गुरु की 10 वर्षों तक निष्ठापूर्वक सेवा की।
इसी दौरान उन्होंने राधा वल्लभ संप्रदाय में दीक्षा ली और पूर्ण रूप से राधा रानी की भक्ति में डूब गए।
संघर्ष का दौर — जब जीवन परीक्षा बन गया
करीब 25-30 वर्ष पहले वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उस समय जिस आश्रम में वे रहते थे, वहां से उन्हें बाहर निकाल दिया गया।
वे वृंदावन के काली देह क्षेत्र में बिना भोजन के कई दिन रहे, लेकिन उनका विश्वास अटल था।
भक्ति और भरोसे ने उन्हें संभाला — और वही भरोसा आज उनके लाखों भक्तों के दिलों में विश्वास की ज्योति बन चुका है।
18 साल से खराब किडनी के साथ चमत्कारी जीवन
प्रेमानंद महाराज पिछले 18-20 सालों से Polycystic Kidney Disease (PKD) नामक गंभीर आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें दोनों किडनियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं।
इतनी गंभीर बीमारी के बावजूद वे प्रतिदिन भक्तों से मिलने आते हैं और खुद चलकर प्रवचन स्थल तक पहुंचते हैं।
वे अपनी दोनों किडनियों को “राधा” और “कृष्ण” कहते हैं — उनका मानना है कि भगवान स्वयं उनके शरीर में निवास करते हैं।
किडनी दान की पेशकश — लेकिन महाराज का निर्णय
कई भक्तों ने अपनी किडनी दान करने की भावपूर्ण इच्छा व्यक्त की, जिनमें रमेश चंद्र शुक्ला और राज कुंद्रा जैसे नाम भी शामिल हैं।
लेकिन महाराज जी ने सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए।
वे कहते हैं — “मैं किसी और का अंग लेकर नहीं जीना चाहता। यह शरीर अब जैसा है, वैसा ही प्रभु की कृपा है।”
प्रेमानंद महाराज की 7 अनमोल शिक्षाएं
1. टूटना नहीं, कटना सीखो
मंदिर की मूर्ति तिल-तिल करके काटी गई है, पर टूटी नहीं — इसलिए पूजी जाती है। जो टूट जाता है, वह पैरों तले बिछ जाता है।
2. दुख को वरदान समझो
ईश्वर से यह मत कहो कि दुख दूर कर दो, बल्कि यह कहो कि उसे सहने की शक्ति दो।
3. मान को विष मानो, अपमान को अमृत
जहां मान प्रिय लगने लगे, वहां से साधुता खत्म होती है। अपमान सहना ही आत्मशुद्धि है।
4. सच्चाई ही जीवन की सबसे बड़ी ताकत
झूठ और छल कुछ समय का लाभ देते हैं, पर सच्चाई जीवनभर आत्मबल देती है।
5. सोच बदलो, जीवन बदल जाएगा
सकारात्मक सोच वाला गरीब भी सुखी होता है, जबकि नकारात्मक सोच वाला अमीर भी दुखी रहता है।
6. निस्वार्थ सेवा ही सच्ची भक्ति
जब हम बिना स्वार्थ के किसी की मदद करते हैं, तभी सच्ची भक्ति का अनुभव होता है।
7. नाम जप ही कलियुग का सबसे बड़ा साधन
कलियुग में भगवान के नाम का जप ही मोक्ष का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है।
रात की पदयात्रा — आस्था की मिसाल
रात 2 से 3 बजे तक महाराज जी श्री कृष्ण शरणम सोसाइटी से अपने आश्रम श्रीहित राधा केली कुंज तक करीब 2 किलोमीटर की पदयात्रा करते थे।
इस दौरान हजारों भक्त सड़कों पर उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ते थे।
अब स्वास्थ्य कारणों से यह क्रम रुका है, लेकिन भक्ति का उत्साह वही है।
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा भी भक्त
प्रसिद्ध क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा भी उनके दर्शन के लिए वृंदावन पहुंचे थे।
आज यूट्यूब और सोशल मीडिया पर उनके प्रवचन करोड़ों लोगों को नई दिशा दे रहे हैं।
महाराज का भावुक संदेश
हाल ही में उन्होंने कहा —
“कष्ट है, घबराहट भी है, लेकिन बहुत कृपा है। आप सब प्रसन्न रहिए, जल्दी ही मिलेंगे।”
यह संदेश हर भक्त के मन में शांति और विश्वास भर देता है।
विश्वास का जीवंत प्रमाण
प्रेमानंद महाराज की कहानी सिर्फ एक संत की नहीं, बल्कि उस भक्ति और विश्वास की है जिसने मृत्यु को भी पीछे छोड़ दिया।
वे प्रमाण हैं कि जब मन दृढ़ हो और हृदय भक्ति से भरा हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
उनका जीवन हर इंसान को सिखाता है कि परिस्थितियां नहीं, विश्वास तय करता है कि आप कहां तक जा सकते हैं।




