नियति और जीवन की घटनाएं कैसे एक दूसरे से जुड़ी हैं? क्या हमारा जीवन पहले से लिखी स्क्रिप्ट है? जानिए सच्ची कहानियों और वास्तविक उदाहरणों के साथ।
जब एक छोटी सी घटना पूरी जिंदगी बदल दे
आपने कभी सोचा है कि अगर आप उस दिन पांच मिनट देर से घर से निकले होते, तो क्या आपकी जिंदगी अलग होती? या अगर आपने उस दिन दूसरी सड़क पकड़ी होती? कभी कभी जिंदगी में कुछ ऐसा होता है कि हम रुककर सोचने लगते हैं – क्या ये सब पहले से तय था?
यही है सबसे बड़ा रहस्य।
मेरे एक मित्र की कहानी है। वो एक दिन अपनी ट्रेन चूक गए। गुस्से में थे, परेशान थे। लेकिन अगली ट्रेन में बैठे तो सामने की सीट पर जो शख्स बैठा था, वो आज उनका बिजनेस पार्टनर है। अगर वो पहली ट्रेन पकड़ लेते, तो शायद आज की कहानी कुछ और होती। एक अदृश्य धागा सब कुछ बांधे रखता है।
सब कुछ जुड़ा हुआ है
हम अक्सर सोचते हैं कि जीवन में जो कुछ भी होता है, वो अलग अलग घटनाएं हैं। लेकिन अगर गौर से देखें तो नियति और जीवन की घटनाएं एक दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं। जैसे डोमिनो के पत्थर – एक गिरा तो दूसरा भी गिरेगा।
आज जो आप हैं, वो कल की किसी घटना की वजह से हैं। और कल जो आप होंगे, वो आज के किसी फैसले की वजह से।
क्या सब कुछ पहले से लिखा है?
भारतीय दर्शन में नियति और जीवन को लेकर गहरी मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने हर इंसान की किस्मत उसके माथे पर लिख दी है। लेकिन ये बात कितनी सच है?
नियति और जीवन पर दो नजरिए हैं:
पहला नजरिया – कुछ लोग मानते हैं कि सब कुछ पूर्व निर्धारित है। जो होना है वो होकर रहेगा। आप कितनी भी कोशिश कर लें, नियति से बच नहीं सकते। जैसे एक फिल्म की स्क्रिप्ट पहले से लिखी होती है, वैसे ही नियति और जीवन भी।
दूसरा नजरिया – कुछ लोग कहते हैं कि इंसान के हाथ में अपनी किस्मत बदलने की ताकत है। कर्म ही प्रधान है। आप जैसा करेंगे, वैसा भरेंगे। यानी नियति और जीवन आप खुद बनाते हैं।
सच शायद इन दोनों के बीच में कहीं है।
जीवन की स्क्रिप्ट: लिखी हुई या लिखने योग्य?
एक पुरानी कहानी है जो नियति और जीवन की घटनाएं को समझाती है।
एक राजा ज्योतिषी के पास गया। ज्योतिषी ने कहा, “महाराज, आपके बेटे की शादी 25 साल की उम्र में होगी और वो बहुत खुश रहेगा।”
राजा ने सोचा, चलो देखते हैं ये नियति कैसे काम करती है। उसने अपने बेटे को 24 साल की उम्र में एक दूर के पहाड़ी इलाके में भेज दिया जहां कोई नहीं रहता था।
लेकिन वहां पहाड़ों में एक साधु की बेटी मिल गई। दोनों में प्रेम हो गया और 25 साल की उम्र में शादी हो गई।
ये कहानी हमें बताती है कि नियति कैसे काम करती हैं। चाहे हम कितना भी बचने की कोशिश करें, अगर कुछ होना है तो वो होकर रहता है।
श्रृंखला बंधन
जीवन में कुछ भी अकेला नहीं होता। नियति और जीवन ऐसे जुड़ी होती हैं कि हर घटना किसी न किसी पिछली घटना का नतीजा है:
- आपकी आज की नौकरी शायद उस कॉलेज के दोस्त की वजह से मिली जो आपको 10 साल पहले मिला था
- आपकी शादी शायद उस शादी में हुई जिसमें आप जाना नहीं चाहते थे
- आपकी सफलता शायद उस असफलता की वजह से मिली जो आपको तोड़ने आई थी
हर घटना अगली घटना के लिए जमीन तैयार करती है।
कर्म और नियति
भगवद गीता में कहा गया है, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” यानी तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म पर है, फल पर नहीं। इसका मतलब ये है कि हम अपने कर्म तो कर सकते हैं, लेकिन नतीजा हमारे हाथ में नहीं है। ये नियति तय करती है।
क्या हम कठपुतली हैं?
जब हम नियति और जीवन के बारे में सोचते हैं तो ये सवाल अक्सर मन में आता है। अगर सब कुछ पहले से तय है, तो फिर कोशिश क्यों करें? फिर मेहनत क्यों करें? जवाब सरल है। हमें ये नहीं पता कि क्या लिखा है। इसलिए हमें अपना काम करते रहना चाहिए। एक किसान बीज बोता है, लेकिन बारिश उसके हाथ में नहीं है। फिर भी वो बीज बोना बंद नहीं करता। वैसे ही नियति और जीवन में हमें अपना कर्म करते रहना चाहिए। नतीजा जो भी हो, वो हमारे भले के लिए होगा।
वर्तमान का महत्व: आज से शुरू होती हैं
अगर नियति और जीवन की घटनाएं जुड़ी हुई हैं, तो आज जो आप कर रहे हैं वो भविष्य की नींव है। आपका हर फैसला, हर कदम, हर शब्द आगे की कहानी लिख रहा है। इसलिए वर्तमान में जीना जरूरी है। ना पिछले पर पछताते रहो, ना भविष्य की चिंता में घुलो। अभी जो हाथ में है, उसे अच्छे से करो। यही नियति और जीवन का सबसे बड़ा सबक है।
छोटी छोटी बातों का बड़ा असर
कभी किसी को एक मुस्कान दी। उस व्यक्ति का दिन बन गया। उसने घर जाकर अपने बच्चे को प्यार से पढ़ाया। बच्चे ने मन लगाकर पढ़ा। साल भर बाद वो इम्तिहान में अव्वल आया। आपकी एक मुस्कान ने एक बच्चे की जिंदगी बदल दी। और आपको पता भी नहीं चला। यही है नियति और जीवन का जादू। ऐसे ही हर काम का असर होता है। कभी तुरंत दिखता है, कभी सालों बाद।

संयोग या नियोजित: नियति और जीवन की घटनाएं का रहस्य
जिंदगी में कुछ चीजें होती हैं जो संयोग लगती हैं। लेकिन नियति और जीवन के नजरिए से देखें तो क्या वो सच में संयोग हैं?
- किसी खास व्यक्ति से अचानक मिलना
- किसी किताब का अचानक मिल जाना जो आपकी जिंदगी बदल दे
- किसी जगह पर गलती से पहुंच जाना जहां आपकी किस्मत बदल जाए
हम इन्हें संयोग कहते हैं। लेकिन शायद नियति और जीवन की घटनाएं में ये सब भी उसी बड़ी स्क्रिप्ट का हिस्सा हैं।
भरोसा रखना सीखें
जब हम नियति और जीवन को समझ लेते हैं और ये मान लेते हैं कि सब कुछ एक कारण से हो रहा है, तो जीना आसान हो जाता है। दुख आए तो लगता है कि ये भी गुजर जाएगा। खुशी आए तो शुक्रगुजार होते हैं। हर परिस्थिति हमें कुछ सिखाने आती है। हर इंसान जो हमारी जिंदगी में आता है, कोई न कोई सबक लेकर आता है। यही नियति और जीवन की घटनाएं का गहरा अर्थ है।
आने वाला कल: नियति और जीवन का अगला अध्याय
हम नहीं जानते कल क्या होगा। लेकिन नियति और जीवन का एक नियम तय है – जो भी होगा, वो आज के किसी कर्म से जुड़ा होगा।
इसलिए:
- अच्छे कर्म करो
- दूसरों की मदद करो
- सकारात्मक रहो
- मेहनत करते रहो
नतीजा जो भी होगा, वो सही होगा। क्योंकि ब्रह्मांड की एक बड़ी योजना का हिस्सा हैं।
असफलता भी एक पड़ाव है
कई बार जिंदगी में लगता है कि सब कुछ बिगड़ गया। लेकिन बाद में पता चलता है कि वो असफलता अगली सफलता की सीढ़ी थी।
स्टीव जॉब्स को जब Apple से निकाला गया, तो उन्होंने सोचा कि सब खत्म हो गया। लेकिन बाद में वही घटना उनकी सबसे बड़ी सीख बनी और वो और भी सफल होकर लौटे। यही है नियति और जीवन का सच।
चलते रहो, कर्म करते रहो
नियति और जीवन की घटनाएं है या नहीं, ये बहस का विषय है। लेकिन एक बात तय है – हमें अपना काम करते रहना है। रुकना नहीं है। घबराना नहीं है। जिंदगी एक सफर है। कभी मोड़ आते हैं, कभी सीधी सड़क मिलती है। कभी अंधेरा होता है, कभी रोशनी। लेकिन नियति और जीवन का भरोसा रखते हुए चलते रहना है।
आखिर में जब पीछे मुड़कर देखेंगे, तो सब कुछ साफ दिखेगा। हर घटना की एक वजह थी। हर मुलाकात जरूरी थी। हर सबक काम आया। तब समझ आएगा कि नियति और जीवन की घटनाएं सच में एक लिखी हुई स्क्रिप्ट हैं। लेकिन इसे जीते वक्त हमें ऐसे जीना है जैसे सब कुछ हमारे हाथ में है। क्योंकि शायद नियति और जीवन वही बनती हैं जो हम खुद बनाते हैं।
याद रखिए: कल का क्या होगा, ये किसी को नहीं पता। लेकिन आज जो कर रहे हैं, वही कल की नींव है। नियति और जीवन की घटनाएं हमें यही सिखाती हैं – अच्छे कर्म करो, सकारात्मक सोचो, और जीवन को पूरी ईमानदारी से जियो। नियति अपना काम खुद कर लेगी।




