कुणाल शाह ने FreeCharge की विफलता के बाद कैसे CRED को बनाया और युनिकॉर्न बनाया? जानिए 400 करोड़ के नुकसान से उबरकर 6.4 अरब डॉलर की कंपनी खड़ी करने की पूरी कहानी।
एक दार्शनिक छात्र से अरबपति उद्यमी तक
कुणाल शाह CRED के फाउंडर की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं लगती। 15 साल की उम्र में परिवार की आर्थिक मदद के लिए काम करने वाला लड़का आज भारत के सबसे चर्चित उद्यमियों में से एक है। मुंबई के एक मध्यमवर्गीय गुजराती परिवार में जन्मे कुणाल शाह CRED को बनाने से पहले कई संघर्षों से गुजरे।
लेकिन जो बात कुणाल शाह CRED के साथ अलग बनाती है, वह है उनका सोचने का तरीका। IIT या IIM की डिग्री के बिना, फिलॉसफी में ग्रेजुएशन करके भी उन्होंने दो बिलियन डॉलर की कंपनियां खड़ी कीं। आज कुणाल शाह CRED को 6.4 अरब डॉलर की वैल्यूएशन तक ले गए हैं।
FreeCharge का उदय: पहली बड़ी सफलता
2010 में कुणाल शाह और संदीप टंडन ने FreeCharge की शुरुआत की। उस समय मोबाइल रिचार्ज बाजार में Paytm जैसे खिलाड़ी पहले से मौजूद थे, लेकिन कुणाल शाह ने कुछ अलग सोचा। उन्होंने कैशबैक और रिवॉर्ड्स का कॉन्सेप्ट लाया जो उस समय काफी नया था।
FreeCharge की रणनीति सरल थी लेकिन क्रांतिकारी – मोबाइल रिचार्ज मुफ्त में करो और कैशबैक के रूप में पैसे वापस पाओ। यह “लॉस लीडर स्ट्रैटजी” थी, जिसे ग्रोसरी स्टोर्स अपनाते हैं। लाखों यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर लाओ, फिर धीरे-धीरे मोनेटाइजेशन के रास्ते खोजो।
यह दांव सफल रहा। 2015 तक FreeCharge इतनी बड़ी हो चुकी थी कि Snapdeal ने इसे 400 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,600 करोड़ रुपये में खरीद लिया। यह उस समय भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का सबसे बड़ा अधिग्रहण था। कुणाल शाह रातोंरात हीरो बन गए।
अचानक पतन: FreeCharge की कहानी का दूसरा अध्याय
लेकिन सफलता की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। Snapdeal द्वारा अधिग्रहण के बाद FreeCharge का पतन शुरू हो गया। Snapdeal खुद कई समस्याओं से जूझ रही थी। Flipkart और Amazon के सामने वह लगातार पिछड़ती जा रही थी।
2016 में कुणाल शाह ने FreeCharge छोड़ दिया। उसके बाद की कहानी और भी दर्दनाक है। डेमोनेटाइजेशन के दौरान जब Paytm ने करोड़ों नए यूजर्स जोड़े, FreeCharge पीछे रह गई। प्रबंधन की कमजोरियां, धन की बर्बादी और स्पष्ट दिशा की कमी ने FreeCharge को डुबो दिया।
2017 में Snapdeal को FreeCharge केवल 60 मिलियन डॉलर (करीब 385 करोड़ रुपये) में Axis Bank को बेचनी पड़ी। यह खरीद मूल्य का सिर्फ 15% था। 85% का नुकसान। भारतीय स्टार्टअप इतिहास की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक।
कई लोगों ने सोचा कि कुणाल शाह का करियर यहीं खत्म हो जाएगा। लेकिन असली कहानी अभी शुरू होनी थी।
नए सिरे से शुरुआत: कुणाल शाह CRED की स्थापना
FreeCharge छोड़ने के बाद कुणाल शाह CRED बनाने से पहले करीब दो साल का समय लिया। इस दौरान वे एंजेल इन्वेस्टिंग में एक्टिव रहे। उन्होंने 200 से ज्यादा स्टार्टअप्स में निवेश किया, जिनमें Razorpay, Unacademy और BharatPe शामिल हैं।
लेकिन उनके दिमाग में एक नया आइडिया आकार ले रहा था। वे देख रहे थे कि भारत में क्रेडिट कार्ड होल्डर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बिल पेमेंट का अनुभव बेहद खराब है। लोग बिल भूल जाते हैं, लेट फीस देते हैं, क्रेडिट स्कोर खराब होता है।
कुणाल शाह ने सोचा – क्यों न एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए जो अच्छे फाइनेंशियल बिहेवियर को रिवॉर्ड करे? और 2018 में CRED का जन्म हुआ।
CRED की शुरुआती चुनौतियां और नुकसान
CRED की शुरुआत आसान नहीं थी। 2019-20 में कंपनी ने 360 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया। पहले साल में कंपनी का रेवेन्यू लगभग जीरो था, जबकि खर्च 64 करोड़ रुपये था।
मार्केटिंग पर ही 21 करोड़ रुपये खर्च हुए। कुछ लोगों ने सवाल उठाए – क्या यह FreeCharge की गलतियों को दोहराना नहीं है? क्या कुणाल शाह फिर से वही रास्ता अपना रहे हैं जो पहले विफल हो चुका है?
लेकिन कुणाल शाह की रणनीति अलग थी। उन्होंने भीड़ को टारगेट नहीं किया। CRED सिर्फ उन लोगों के लिए था जिनका क्रेडिट स्कोर 750 से ज्यादा है। यह भारत की आबादी का केवल 20% हिस्सा है, लेकिन यही वह वर्ग है जो सबसे ज्यादा खर्च करता है।
क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड्स: जो चीज बदल गई सबकुछ
CRED का बिजनेस मॉडल सरल था – लोग अपना क्रेडिट कार्ड बिल समय पर CRED ऐप के जरिए भरें और बदले में CRED कॉइन्स पाएं। ये कॉइन्स प्रीमियम ब्रांड्स पर छूट, एक्सक्लूसिव ऑफर्स और अन्य लाभों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
कुणाल शाह का विचार था कि लोगों को अच्छे व्यवहार के लिए रिवॉर्ड मिलना चाहिए। जो लोग समय पर बिल भरते हैं, उन्हें सम्मान और लाभ मिलना चाहिए। यह सिर्फ एक ऐप नहीं था, बल्कि एक “ट्रस्टेड कम्युनिटी” बनाने का प्रयास था।
और यह काम कर गया। 2021 तक CRED के पास 59 लाख यूजर्स हो गए। यह भारत के कुल क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट्स का 22% प्रोसेस कर रहा था। कुणाल शाह की रणनीति सफल साबित हुई।

युनिकॉर्न बनने की यात्रा: तेज और शानदार
CRED की वैल्यूएशन में वृद्धि अविश्वसनीय थी।
- अगस्त 2019: पहले फंडिंग राउंड में 450 मिलियन डॉलर की वैल्यूएशन
- जनवरी 2021: 80 मिलियन डॉलर की फंडिंग, 800 मिलियन डॉलर की वैल्यूएशन
- अप्रैल 2021: 215 मिलियन डॉलर की फंडिंग, 2.2 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन – युनिकॉर्न स्टेटस
तीन महीने में वैल्यूएशन तीन गुना हो गई! यह भारतीय स्टार्टअप इतिहास में सबसे तेज युनिकॉर्न बनने की कहानियों में से एक थी।
- अक्टूबर 2021: 251 मिलियन डॉलर की और फंडिंग, 4 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन
- 2022-23: 6.4 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन पर पहुंच गए
कुणाल शाह ने फिर से साबित कर दिया कि वे भारत के सबसे प्रतिभाशाली उद्यमियों में से एक हैं।
CRED का विस्तार: सिर्फ क्रेडिट कार्ड से आगे
CRED ने धीरे-धीरे अपनी सेवाओं का विस्तार किया:
CRED RentPay: लोग अपने मासिक किराए का भुगतान क्रेडिट कार्ड से कर सकते हैं। यह उन लोगों के लिए बड़ी सुविधा है जो कैश फ्लो मैनेज करना चाहते हैं।
CRED Cash: यह एक शॉर्ट-टर्म क्रेडिट लाइन है जो यूजर्स को तुरंत पैसा उपलब्ध कराती है।
CRED Mint: अगस्त 2021 में लॉन्च किया गया पीयर-टू-पीयर लेंडिंग प्लेटफॉर्म। यूजर्स एक-दूसरे को 9% ब्याज दर पर पैसा उधार दे सकते हैं।
CRED Store: 500 से ज्यादा प्रीमियम ब्रांड्स के साथ एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म। यहां CRED कॉइन्स का इस्तेमाल करके खरीदारी की जा सकती है।
CRED Pay: मर्चेंट पेमेंट्स के लिए एक गेटवे जो UPI पर काम करता है।
CRED Garage: गाड़ियों से जुड़ी सेविसेज जैसे चालान चेक करना, इंश्योरेंस रिन्यूअल आदि।
कुणाल शाह CRED को एक “सुपर ऐप” में बदलना चाहते थे जो प्रीमियम यूजर्स की सभी फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करे।
आलोचना और चुनौतियां: क्या CRED सचमुच लाभदायक है?
लेकिन CRED की कहानी भी विवादों से मुक्त नहीं है। 2024 तक कंपनी ने अभी तक एक भी प्रॉफिटेबल साल नहीं देखा है।
- FY 2020: 360 करोड़ रुपये का नुकसान
- FY 2022: 1,280 करोड़ रुपये का नुकसान
- FY 2023: 1,347 करोड़ रुपये का नुकसान
- FY 2024: 1,644 करोड़ रुपये का नुकसान (हालांकि ऑपरेटिंग लॉस 41% घटकर 609 करोड़ रुपये रहा)
कुल मिलाकर सात सालों में कंपनी ने 5,215 करोड़ रुपये का नुकसान किया है, जबकि कुल रेवेन्यू सिर्फ 4,500 करोड़ रुपये के आसपास रहा।
हाल ही में एक Deloitte कंसल्टेंट ने LinkedIn पर सवाल उठाया कि 15 साल की उद्यमिता के बाद भी कुणाल शाह की कोई कंपनी प्रॉफिटेबल क्यों नहीं हुई?
कुणाल शाह का जवाब दिलचस्प था। उन्होंने कहा, “हमें उन उद्यमियों का जश्न मनाना चाहिए जिन्होंने प्रॉफिटेबल कंपनियां बनाई हैं। लेकिन हमें उन सभी का भी सम्मान करना चाहिए जो जोखिम ले रहे हैं और उद्यमी बन रहे हैं। AI-संचालित भविष्य में, नौकरी खोजना उद्यमी बनने से ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है।”

कुणाल शाह की सोच: Delta 4 थ्योरी और नवाचार
कुणाल शाह सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं हैं, वे एक विचारक भी हैं। उनकी “Delta 4 थ्योरी” भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में काफी लोकप्रिय है।
Delta 4 थ्योरी कहती है कि कोई भी प्रोडक्ट तभी सफल होता है जब वह मौजूदा समाधान से इतना बेहतर हो कि यूजर वापस पुराने तरीके पर नहीं जाना चाहे।
उदाहरण के लिए, WhatsApp ने SMS को पूरी तरह बदल दिया क्योंकि यह मुफ्त था और ज्यादा फीचर्स देता था। Google ने अन्य सर्च इंजनों से बेहतर परिणाम दिए।
कुणाल शाह का मानना है कि CRED भी यही कर रहा है – क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट को इतना आसान और फायदेमंद बना रहा है कि लोग पुराने तरीके पर वापस नहीं जाना चाहते।
कुणाल शाह की निजी जिंदगी और निवेश
कुणाल शाह मुंबई में 20 मई 1983 को पैदा हुए। उनकी पत्नी भावना शाह एक फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनर हैं।
विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने NMIMS से MBA शुरू किया लेकिन बीच में ही छोड़ दिया। उनका मानना था कि असली सीख व्यावहारिक अनुभव से मिलती है।
कुणाल शाह भारत के सबसे सक्रिय एंजेल इन्वेस्टर्स में से एक हैं। उन्होंने 200 से ज्यादा स्टार्टअप्स में निवेश किया है, जिनमें Razorpay, Unacademy, BharatPe, और कई अन्य शामिल हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा है।
IPL स्पॉन्सरशिप और मार्केटिंग जीनियस
CRED की मार्केटिंग स्ट्रैटजी भी काफी अलग रही है। 2020 से 2023 तक कंपनी Indian Premier League (IPL) की आधिकारिक प्रायोजक रही।
CRED के विज्ञापन अपने क्विर्की और मजेदार कंटेंट के लिए जाने जाते हैं। सेलिब्रिटीज को अनोखे तरीके से पेश किया जाता है। “Not everyone gets it” टैगलाइन ने ब्रांड को एक एक्सक्लूसिव और प्रीमियम इमेज दी।
हालांकि इस भारी-भरकम मार्केटिंग पर आलोचना भी हुई कि कंपनी पैसे की बर्बादी कर रही है। लेकिन कुणाल शाह का तर्क था कि प्रीमियम यूजर्स तक पहुंचने के लिए ब्रांड बिल्डिंग जरूरी है।
2024 में CRED की स्थिति
2024 के वित्तीय वर्ष में CRED का रेवेन्यू 66% बढ़कर 2,473 करोड़ रुपये हो गया। Monthly Transacting Users (MTU) 34% बढ़े, और Total Payment Value (TPV) 55% बढ़कर 6.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट में 40% की कमी आई, जो दर्शाता है कि कंपनी अब ज्यादा कुशलता से बढ़ रही है। ऑपरेटिंग लॉस 41% घटकर 609 करोड़ रुपये रह गया।
CRED अब भारत में क्रेडिट कार्ड यूजर्स का 22% हिस्सा सर्व करता है। यह UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू में पांचवें नंबर पर है, Amazon Pay से भी आगे।
CRED का भविष्य: क्या प्रॉफिटेबिलिटी आएगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है – क्या CRED कभी प्रॉफिटेबल होगा?
कुणाल शाह और उनकी टीम का मानना है कि हां। कंपनी ने 2024 में दावा किया कि उसका कंट्रीब्यूशन मार्जिन (जो वेरिएबल कॉस्ट्स को काउंट करता है) 20 गुना बढ़ा है और नौ तिमाहियों से पॉजिटिव है।
CRED अब सिर्फ क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट पर निर्भर नहीं है। लेंडिंग, ई-कॉमर्स, इंश्योरेंस, और UPI पेमेंट्स से रेवेन्यू स्ट्रीम्स बन रही हैं। अगर कंपनी अपने प्रीमियम यूजर बेस का सही से मोनेटाइजेशन कर सके, तो प्रॉफिटेबिलिटी संभव है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि CRED का असली गेम फाइनेंशियल सर्विसेज में है। क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, इंश्योरेंस – ये सभी हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स हैं। अगर CRED अपने ट्रस्टेड यूजर बेस को इन प्रोडक्ट्स की तरफ ले जा सके, तो प्रॉफिटेबिलिटी दूर नहीं।

सबक: कुणाल शाह की सफलता से क्या सीखें?
कुणाल शाह की यात्रा कई महत्वपूर्ण सबक देती है:
1. असफलता अंत नहीं है: FreeCharge की विफलता के बाद भी कुणाल शाह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और बेहतर रणनीति के साथ वापस आए।
2. टारगेट ऑडियंस को समझो: CRED ने भीड़ के पीछे भागने के बजाय एक स्पेसिफिक, हाई-वैल्यू सेगमेंट को टारगेट किया। यह रणनीति सफल रही।
3. लॉन्ग-टर्म सोचो: कुणाल शाह शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट्स के पीछे नहीं भागे। उन्होंने एक मजबूत कम्युनिटी बनाने पर फोकस किया।
4. ट्रस्ट बिल्ड करो: CRED का पूरा बिजनेस मॉडल ट्रस्ट पर आधारित है। अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले लोग, जिम्मेदार व्यवहार, प्रीमियम अनुभव – सब ट्रस्ट बनाते हैं।
5. अलग सोचो: कुणाल शाह ने हमेशा परंपरागत तरीके को चुनौती दी। फिलॉसफी की डिग्री से लेकर Delta 4 थ्योरी तक, उनका अप्रोच हमेशा यूनीक रहा।
एक प्रेरणादायक यात्रा
कुणाल शाह की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो कुछ बड़ा करना चाहता है। 15 साल की उम्र से काम करने वाला लड़का, जिसने परिवार की आर्थिक मदद के लिए हर तरह का काम किया, आज 6.4 बिलियन डॉलर की कंपनी चला रहा है।
FreeCharge की विफलता और 400 करोड़ रुपये के शुरुआती नुकसान के बावजूद, कुणाल शाह ने CRED को युनिकॉर्न बनाया। आज CRED भारत की सबसे चर्चित फिनटेक कंपनियों में से एक है।
क्या CRED प्रॉफिटेबल होगा? समय ही बताएगा। लेकिन एक बात तय है – कुणाल शाह ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पर गहरा प्रभाव डाला है। उन्होंने साबित किया है कि असफलता से सीखकर, अलग सोचकर, और लंबे समय तक टिके रहकर कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
कुणाल शाह CRED के जरिए न सिर्फ एक बिजनेस बना रहे हैं, बल्कि लाखों भारतीयों को जिम्मेदार फाइनेंशियल व्यवहार सिखा रहे हैं।




