शी-मार्ट योजना 2026 – ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा अपना बाजार। जानें कैसे लखपति दीदी बनेंगी बिजनेस लीडर, पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी।
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक क्रांतिकारी पहल की घोषणा की है। शी-मार्ट योजना न केवल स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को एक मंच देगी, बल्कि उन्हें कर्ज आधारित आजीविका से आगे बढ़कर असली उद्यमी बनने का मौका देगी। यह महत्वाकांक्षी योजना लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बनाएगी।
क्या है यह योजना और क्यों है खास?
शी-मार्ट का पूरा नाम सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर मार्ट्स है। ये सामुदायिक स्वामित्व वाले खुदरा आउटलेट होंगे जो विशेष रूप से ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए बनाए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके हस्तनिर्मित उत्पादों, कृषि उत्पादों और घरेलू सामानों के लिए एक संगठित और स्थायी बाजार उपलब्ध कराना है।
पारंपरिक बाजार व्यवस्था में महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए कई बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था। नतीजा यह होता था कि उन्हें अपनी मेहनत का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता था। अब यह समस्या इस सरकारी पहल से दूर होगी। यहां महिलाएं अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगी और उचित दाम प्राप्त कर सकेंगी।
लखपति दीदी योजना से कैसे जुड़ा है शी-मार्ट?
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्ी लखपति दीदी योजना का लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सालाना कम से कम एक लाख रुपये की आय अर्जित करने में सक्षम बनाना था। इस योजना के तहत महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे अचार, पापड़, हस्तशिल्प, कढ़ाई, बुनाई और अन्य कुटीर उद्योगों में दक्ष बनीं।
अब शी-मार्ट योजना लखपति दीदी कार्यक्रम का विस्तार है। जहां लखपति दीदी योजना ने महिलाओं को “बनाना” सिखाया, वहीं शी-मार्ट उन्हें “बेचना” सिखाएगा। यह संयोजन महिलाओं को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
जुलाई 2025 तक देश में 1.48 करोड़ से अधिक लखपति दीदी बन चुकी हैं। शी-मार्ट योजना के माध्यम से इन महिलाओं को अब अपने उत्पादों के लिए एक स्थायी बाजार मिलेगा, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होगी।
शी-मार्ट योजना की प्रमुख विशेषताएं
क्लस्टर स्तर पर स्थापना: शी-मार्ट क्लस्टर लेवल फेडरेशन के भीतर स्थापित किए जाएंगे। इससे एक क्षेत्र की सभी महिला उद्यमियों को एक साथ लाया जा सकेगा और उनकी सामूहिक ताकत बढ़ेगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ाव: इन मार्ट्स को GeM पोर्टल, ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) और e-SARAS जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा। इससे महिलाओं के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलेगी।
वित्तीय सहायता: योजना के तहत महिलाओं को उन्नत और नवीन वित्तीय साधनों की सुविधा दी जाएगी। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा। साथ ही, पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाली महिलाओं के लिए 2 करोड़ रुपये तक का विशेष टर्म लोन भी उपलब्ध होगा।
She-Mark बैज: सरकार ने She-Mark बैज की भी घोषणा की है, जो महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता और विकास केंद्रित साधनों तक पहुंच प्रदान करेगा। यह बैज उनके उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता का प्रमाण होगा।
किन महिलाओं को मिलेगा इस योजना का लाभ?
शी-मार्ट योजना मुख्य रूप से उन महिलाओं के लिए है जो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। यदि कोई महिला इस योजना का लाभ उठाना चाहती है, तो उसे सबसे पहले किसी स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनना होगा।
पात्रता की मुख्य शर्तें:
- आवेदक भारतीय नागरिक होनी चाहिए
- महिला की आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए
- वह किसी स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हो
- ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी
- महिला के पास आधार कार्ड, बैंक खाता और सक्रिय मोबाइल नंबर होना आवश्यक है
शी-मार्ट योजना से जुड़े उत्पाद
इन मार्ट्स में महिलाएं विभिन्न प्रकार के उत्पाद बेच सकेंगी जैसे:
हस्तशिल्प उत्पाद: मिट्टी के बर्तन, बांस के सामान, हाथ से बने खिलौने, सजावटी वस्तुएं
कृषि उत्पाद: अचार, पापड़, मसाले, जैविक खाद्य पदार्थ, शहद, घी
वस्त्र और परिधान: हाथ से बुने कपड़े, कढ़ाई का काम, ड्रेस मटेरियल, साड़ियां
ब्यूटी और पर्सनल केयर: हर्बल साबुन, फेस पैक, तेल, नेचुरल कॉस्मेटिक्स
घरेलू सामान: झाड़ू, डस्टर, रसोई के उपकरण, बैग

कैसे काम करेगा शी-मार्ट?
शी-मार्ट एक इकोसिस्टम के रूप में काम करेगा, न कि केवल एक विक्रय केंद्र के रूप में। इसकी कार्य प्रणाली इस प्रकार होगी:
उत्पाद निर्माण: स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने कौशल के अनुसार विभिन्न उत्पाद तैयार करेंगी।
गुणवत्ता जांच: क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा उत्पादों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी और उन्हें She-Mark बैज से प्रमाणित किया जाएगा।
स्टॉकिंग और डिस्प्ले: शी-मार्ट में इन उत्पादों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। प्रत्येक उत्पाद पर निर्माता का नाम और समूह की जानकारी होगी।
बिक्री: ग्राहक शी-मार्ट से सीधे खरीदारी कर सकेंगे या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑर्डर दे सकेंगे।
भुगतान: महिलाओं को उनके उत्पादों का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में मिलेगा। कोई बिचौलिया नहीं होगा।
शी-मार्ट योजना के दीर्घकालिक लाभ
आर्थिक सशक्तिकरण: महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी और अपने परिवार की आय में योगदान देंगी।
रोजगार सृजन: स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। केवल उत्पाद निर्माण ही नहीं, बल्कि मार्केटिंग, पैकेजिंग, परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ेगा।
कौशल विकास: महिलाओं को नए कौशल सीखने का अवसर मिलेगा। डिजिटल साक्षरता, वित्तीय प्रबंधन और व्यवसाय कौशल में सुधार होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: ग्रामीण क्षेत्रों में पैसे का प्रवाह बढ़ेगा जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सामाजिक परिवर्तन: आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं समाज में बेहतर सम्मान प्राप्त करेंगी। परिवार में निर्णय लेने में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
पर्यावरण संरक्षण: शी-मार्ट में स्थानीय और प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।
डिजिटल युग में शी-मार्ट
आधुनिक समय की मांग को ध्यान में रखते हुए शी-मार्ट योजना डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी होगी। महिलाओं को डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया पर प्रचार और ऑनलाइन बिक्री की ट्रेनिंग दी जाएगी।
GeM पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन से महिला उद्यमी सरकारी खरीद में भी हिस्सा ले सकेंगी। ONDC जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़ने पर उनके उत्पाद देश के कोने-कोने में पहुंच सकेंगे।
कई राज्यों में Reliance JioMart के साथ भी साझेदारी की गई है, जिससे महिलाएं अपने उत्पाद ऑनलाइन बेच सकती हैं। इससे बाजार की पहुंच कई गुना बढ़ जाएगी।

शी-मार्ट योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
हालांकि शी-मार्ट योजना की विस्तृत आवेदन प्रक्रिया अभी जारी नहीं की गई है, लेकिन महिलाएं अभी से तैयारी शुरू कर सकती हैं।
तैयारी के चरण:
स्वयं सहायता समूह से जुड़ें: यदि आप किसी समूह की सदस्य नहीं हैं, तो अपने नजदीकी ग्राम पंचायत या ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस में जाकर जानकारी लें।
कौशल विकास: अपने कौशल को बेहतर बनाएं। सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लें।
आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें: आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र और सक्रिय मोबाइल नंबर जैसे दस्तावेज तैयार रखें।
स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें: ग्रामीण विकास विभाग या राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों से संपर्क करें।
उत्पाद की गुणवत्ता पर ध्यान दें: जो भी उत्पाद बनाएं उसकी गुणवत्ता उत्कृष्ट रखें। अच्छी पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर ध्यान दें।
चुनौतियां और समाधान
किसी भी नई योजना के साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं। शी-मार्ट योजना के लिए संभावित चुनौतियां और उनके समाधान:
जागरूकता की कमी: कई ग्रामीण महिलाओं को इस योजना की जानकारी नहीं होगी। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार जरूरी है। ग्राम स्तर पर जागरूकता शिविर लगाए जाने चाहिए।
डिजिटल साक्षरता: सभी महिलाएं डिजिटल रूप से साक्षर नहीं हैं। इसके लिए विशेष डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।
बुनियादी ढांचा: कुछ दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी हो सकती है। सरकार को इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देना होगा।
बाजार प्रतिस्पर्धा: बड़े ब्रांड्स के साथ प्रतिस्पर्धा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता और अनूठे डिजाइन पर जोर देना होगा।
सफलता की कहानियां
हालांकि शी-मार्ट योजना अभी नई है, लेकिन लखपति दीदी योजना की सफलता इसकी संभावनाओं को दर्शाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और अन्य राज्यों में हजारों महिलाएं अपने उत्पाद बनाकर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
कई महिलाएं छोटे समूहों से शुरू करके अब बड़े व्यवसाय चला रही हैं। कुछ ने अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बेचना शुरू कर दिया है। शी-मार्ट योजना इन सफलता की कहानियों को और गति देगी।
यह सिर्फ योजना नहीं, क्रांति है
शी-मार्ट योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में एक नया अध्याय लेकर आएगी। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं के सपनों को साकार करने का माध्यम है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो पूरा समाज और देश मजबूत होता है।
बजट 2026-27 में इस योजना की घोषणा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लखपति दीदी कार्यक्रम की नींव पर खड़ी यह योजना महिलाओं को केवल श्रमिक नहीं, बल्कि उद्यमी और व्यवसायी के रूप में स्थापित करेगी।
जो महिलाएं इस योजना का लाभ उठाना चाहती हैं, उन्हें अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ें, अपने कौशल को निखारें और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। शी-मार्ट योजना सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक बनेगी।




