एक फैसले से बदल जाएगी भारत की राजनीति! One Nation One Election पर देशभर में मचा हंगामा

One Nation One Election — यह सिर्फ तीन शब्द नहीं हैं। यह एक ऐसा फैसला है जो आने वाले दशकों तक भारत की राजनीति, आपकी जेब और आपके वोट की ताकत को हमेशा के लिए बदल सकता है।

लेकिन क्या आपको पता है कि इस पर असली बहस कहाँ हो रही है? न TV पर, न अखबार में। असली सवाल वो हैं जो न सरकार उठाती है, न विपक्ष जवाब देता है।

तो आज हम वही बताएंगे।

One Nation One Election है क्या? पहले यह समझो

सीधे शब्दों में कहें तो, One Nation One Election एक ऐसा प्रस्ताव है जिसके तहत Lok Sabha और देश के सभी 28 राज्यों एवं 8 केंद्रशासित प्रदेशों की Vidhan Sabha के चुनाव एक साथ या एक तय समयसीमा के भीतर कराए जाएंगे।

सुनने में simple लगता है, है ना?

लेकिन रुकिए, असली बात अभी बाकी है।

यह idea कोई नया नहीं है। आज़ादी के बाद 1951 से 1967 तक भारत में Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही होते थे। यह सिलसिला 16 साल तक चला।

फिर क्या हुआ? 1960 के दशक में राजनीतिक अस्थिरता और दलबदल की वजह से यह साझा चुनाव प्रणाली टूट गई और चुनावों के चक्र अलग-अलग हो गए।

57 साल बाद सरकार उसी पुरानी व्यवस्था को नए रूप में वापस लाना चाहती है। और इसी के साथ शुरू हुआ देश का सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद।

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वो आंकड़ा जो आपको हिला देगा

क्या आपने सोचा कभी कि भारत में चुनाव पर कितना पैसा खर्च होता है?

2024 के Lok Sabha चुनाव में अनुमानित ₹1,20,000 करोड़ खर्च हुए, जो इसे दुनिया का सबसे महँगा चुनाव बनाता है। 2019 में यह रकम ₹60,000 करोड़ थी और 2014 में ₹30,000 करोड़, यानी हर चुनाव में खर्च दोगुना होता जा रहा है।

और यह सिर्फ Lok Sabha की बात है।

भारत में एक सामान्य पाँच साल के Lok Sabha कार्यकाल में औसतन 5 से 7 राज्यों के चुनाव हर साल होते हैं। यानी देश लगभग हमेशा election mode में रहता है।

Bill की पूरी कहानी: कब, कैसे, कहाँ हुआ?

यहीं से कहानी और दिलचस्प हो जाती है।

सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई। इस समिति को 21,500 से अधिक लोगों के जवाब मिले जिनमें से 80% लोग एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में थे।

समिति ने 18,000 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की।

18 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने One Nation One Election की सिफारिशों को मंज़ूरी दे दी।

और फिर आया वो ऐतिहासिक दिन।

17 दिसंबर 2024 को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने Lok Sabha में Constitution (129th Amendment) Bill, 2024 पेश किया। 269 सांसदों ने पक्ष में और 196 ने विरोध में वोट दिया।

इसके बाद Bill को एक 39 सदस्यीय Joint Parliamentary Committee को भेज दिया गया जिसमें 27 Lok Sabha और 12 Rajya Sabha सांसद शामिल हैं।

सिर्फ सपना नहीं, ठोस तर्क भी हैं

1. पैसों की भारी बचत

One Nation One Election लागू होने से ₹7,500 से ₹12,000 करोड़ तक की बचत हो सकती है। वह पैसा जो अभी बार-बार होने वाले चुनावों पर बर्बाद होता है, वह सीधे विकास कार्यों में लग सकता है।

2. Model Code of Conduct का कम झंझट

बार-बार Model Code of Conduct लागू होने से सरकारी योजनाएँ और विकास कार्य थम जाते हैं। इस रुकावट को काफी हद तक खत्म कर सकता है।

3. सुरक्षाबलों का बेहतर उपयोग

2024 के Lok Sabha चुनावों में Election Commission ने 3.4 लाख CAPF जवानों की माँग की थी जिससे सीमा और आंतरिक सुरक्षा में कमी आई। इस deployment को एकीकृत करके सुरक्षा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगा।

4. चुनावी भ्रष्टाचार पर लगाम

2024 के महाराष्ट्र और झारखंड चुनावों में प्रवर्तन एजेंसियों ने ₹1,000 करोड़ से अधिक की नकदी, शराब और ड्रग्स ज़ब्त की। कम चुनाव मतलब कम मौके, और कम मौके मतलब कम भ्रष्टाचार।

लेकिनखतरे भी कम नहीं हैं – यह सब इतना आसान नहीं

अब आते हैं उस बात पर जो न सरकार बताती है, न मीडिया ठीक से समझाती है।

1. Federalism पर सीधा हमला?

आलोचकों का कहना है कि One Nation One Election से national parties को भारी फायदा होगा और क्षेत्रीय दल हाशिए पर चले जाएंगे। इससे देश का संघीय ढाँचा कमज़ोर पड़ सकता है।

सोचिए, अगर हर बार Lok Sabha की लहर में Vidhan Sabha का वोट भी बह जाए तो क्या बिहार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की क्षेत्रीय पहचान बचेगी?

2. जवाबदेही कम होगी?

हर पाँच साल में सिर्फ एक बार चुनाव होने से सरकारें जनता के प्रति कम जवाबदेह हो जाएंगी। अभी जब भी कोई राज्य सरकार जनता को नाराज़ करती है, कुछ ही महीनों में उसे चुनावी नतीजा मिल जाता है।

3. अगर सरकार बीच में गिर जाए?

अगर किसी राज्य की सरकार 5 साल से पहले गिर जाए तो शेष बचे कार्यकाल के लिए नई विधानसभा का गठन होगा जिसका कार्यकाल अगले Lok Sabha चुनाव तक सीमित रहेगा।

यह व्यवस्था कितनी democratic है? यह सवाल अभी तक अनुत्तरित है।

संसद में क्या हुआ? विपक्ष की असली आपत्ति

Samajwadi Party के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यह Bill संविधान की मूल भावना को कमज़ोर करता है।

Congress ने यहाँ तक कह दिया कि Modi सरकार दरअसल ‘One Nation, No Election’ की तैयारी कर रही है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या विरोध सिर्फ राजनीतिक है?

23वें Law Commission ने JPC के सामने कहा कि One Nation One Election Bills संविधान की basic structure का उल्लंघन नहीं करते।

JPC की बैठक में पूर्व Chief Justice Jagdish Singh Khehar और Justice D Y Chandrachud ने भी अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।

कानूनी विशेषज्ञों में भी एकमत नहीं है। और यही इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी जटिलता है।

2034 की कड़वी सच्चाई जो कोई नहीं बताता

यह वो हिस्सा है जो आपको हैरान कर देगा।

लोग सोच रहे हैं अगले चुनाव तक आ जाएगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहती है।

Election Commission ने बताया कि एक साथ चुनाव कराने के लिए 26.5 लाख ballot units, 17.8 लाख control units और 17.8 लाख VVPAT machines की भारी कमी है।

सिर्फ नई EVMs खरीदने पर ₹10,000 करोड़ खर्च होंगे और इसके लिए 15 साल की planning चाहिए।

Kovind Committee की रिपोर्ट के अनुसार One Nation One Election का वास्तविक क्रियान्वयन 2034 तक ही संभव हो पाएगा।

और सबसे बड़ा सवाल?

संविधान संशोधन के लिए Lok Sabha में 362 और Rajya Sabha में 167 सांसदों का समर्थन चाहिए। फिलहाल NDA के पास यह आंकड़ा नहीं है।

तो जो लोग कह रहे हैं कि यह जल्द आने वाला है, वे या तो गलत हैं या अधूरी जानकारी दे रहे हैं।

दुनिया में कहाँ-कहाँ होता है ऐसा?

इतना ही नहीं, एक और पहलू देखिए।

2024 में Indonesia ने दुनिया के सबसे बड़े single-day elections सफलतापूर्वक कराए जिसमें करीब 20 करोड़ मतदाताओं ने राष्ट्रपति से लेकर नगर पालिका तक पाँच स्तरों पर एक साथ वोट डाला।

भारत के पड़ोसी देश Pakistan में भी national और state level के चुनाव साथ होते हैं। Nepal में तो तीनों स्तरों पर एक साथ चुनाव होते हैं।

तो भारत मे भी असंभव नहीं है। सवाल सिर्फ यह है कि भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में यह कितना व्यावहारिक होगा।

आपका फैसला क्या है?

One Nation One Election एक ऐसा मुद्दा है जिस पर न पूरी तरह हाँ कही जा सकती है, न ही पूरी तरह ना।

एक तरफ है करोड़ों रुपयों की बचत, बेहतर governance और विकास में कम रुकावट। दूसरी तरफ है federalism का सवाल, क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व और सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही।

One Nation One Election सिर्फ एक चुनावी बदलाव नहीं है। यह तय करेगा कि आने वाले दशकों में भारत का लोकतंत्र किस दिशा में जाएगा। और उस फैसले में आपकी राय भी मायने रखती है।

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