भक्ति मयेकर हत्याकांड रत्नागिरी के चिपळून की युवती भक्ति मयेकर की सनकी प्रेमी दुर्वास पाटील द्वारा निर्मम हत्या की पूरी कहानी। जांच में खुलासा हुआ कि दुर्वास एक सीरियल किलर था, जिसने अपनी पूर्व प्रेमिका वैशाली ओम्बले और एक अज्ञात महिला की भी हत्या की थी। जानिए इस हैरान कर देने वाले मामले के बारे में विस्तार से, आरोपी की हिरासत की स्थिति और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की दर्दभरी कहानी।
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले का चिपळून इलाका अपने आमों, समुद्री तटों और शांतिपूर्ण जीवन के लिए जाना जाता है। लेकिन 3 जनवरी, 2025 की सुबह यहां की इस शांति को एक ऐसी घटना ने तोड़ दिया, जिसकी गूंज पूरे राज्य में सुनाई दी। वसंत मयेकर का घर, जो आमतौर पर खुशियों से भरा रहता था, आज सन्नाटे और चिंता में डूबा हुआ था। उनकी बेटी, 22 वर्षीय भक्ति, जो अभी-अभी नर्सिंग की डिग्री पूरी करके घर वापस आई थी और एक उज्ज्वल भविष्य की तैयारी कर रही थी, रात भर घर नहीं लौटी थी। उसका मोबाइल फोन अनुत्तरित था, एक असामान्य और डरावनी चुप्पी थी जो घर के हर सदस्य के दिल में डर बैठा रही थी। एक पिता की चिंता ने आखिरकार उन्हें चिपळून पुलिस थाने की दहलीज तक पहुंचा दिया, जहां उन्होंने अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। यहीं से शुरू हुई एक ऐसी जांच जिसने न सिर्फ एक हत्याकांड, बल्कि एक सीरियल किलर के काले सच को उजागर किया।

घटना की पुलिस जांच
पुलिस ने तुरंत अपनी टीमें तैनात कर दीं। भक्ति के अंतिम ज्ञात स्थानों और उसके मोबाइल फोन के डेटा को ट्रेस किया जाने लगा। आस-पास के दुकानों और इमारतों के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज ने जांच को एक नई दिशा दी। फुटेज में भक्ति को आखिरी बार एक बाइक पर सवार देखा गया था, और उसके पीछे बैठा युवक कोई और नहीं बल्कि उसका अपना बचपन का दोस्त और हाल का प्रेमी, 24 वर्षीय दुर्वास काशीनाथ पाटील था। दुर्वास एक स्थानीय मछुआरा था, जिसका नाम पहले भी छोटे-मोटे झगड़ों और अपराधों में आ चुका था, लेकिन किसी ने उसे एक सनकी हत्यारे के रूप में कल्पना भी नहीं की थी।
पुलिस ने दुर्वास को हिरासत में लेने का फैसला किया। शुरुआती पूछताछ में वह टालमटोल करता रहा, झूठे बयान देता रहा। वह कहता कि उसने भक्ति को शहर में छोड़ दिया था और उसके बाद की उसे कोई जानकारी नहीं है। लेकिन उसकी बॉडी लैंग्वेज, उसकी आंखों में छुपी बेचैनी और बयानों में बार-बार होने वाली असंगतियों ने पुलिस की शंका को और गहरा कर दिया। कड़ी पूछताछ और दबाव की रणनीति अपनाई गई।
अंततः अपराध कबूल कर लिया
आखिरकार, दुर्वास का सब्र टूट गया। लगातार हो रही पूछताछ के सामने उसने हार मान ली। उसने एक भयावह और नृशंस सच्चाई को स्वीकार किया। उसने बताया कि उसने भक्ति के साथ चिपळून के एक सुनसान इलाके में मुलाकात की थी। वहां उसने भक्ति से शादी करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन भक्ति ने स्पष्ट रूप से मना कर दिया और यह भी कहा कि उसके परिवार वालों को यह रिश्ता कभी मंजूर नहीं होगा। यह बात दुर्वास के गुस्से और सनक के लिए ईंधन का काम कर गई। आवेश में आकर उसने आसपास पड़े एक भारी पत्थर को उठाया और भक्ति के सिर पर जोरदार वार कर दिया। एक ही वार में भक्ति की मौत हो गई। इसके बाद, अपने अपराध के निशां छुपाने के लिए, उसने भक्ति के शव को पास की एक नाली में घसीटा और उसे पत्तियों, झाड़ियों और मिट्टी से ढक दिया, उम्मीद करता रहा कि कोई उसे कभी नहीं ढूंढ पाएगा। जब भक्ति का शव बरामद किया गया, तो वह दृश्य दिल दहला देने वाला था। एक पिता की दुनिया उसके सामने तबाह हो गई।
दुर्वास का स्वभाव और उसकी बेतरतीब बयानबाजी पुलिस के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। एक अनुभवी अधिकारी को लगा कि यह सिर्फ एक आवेग में की गई हत्या नहीं, बल्कि कुछ और गहरा रहस्य है। जब पूछताछ और जोरदार हुई, तो दुर्वास के मुंह से एक और नाम निकल गया- वैशाली दत्तात्रेय ओम्बले।
उसने कबूल किया कि भक्ति से करीब चार साल पहले, अगस्त 2021 में, उसने एक और युवती की हत्या की थी। वैशाली ओम्बले, जो उसकी पूर्व प्रेमिका थी। दुर्वास ने बताया कि जब वैशाली ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया, तो उसने भी उसे चिपळून के एक सुनसान खेत में ले जाकर उसी तरह से मार डाला था। वैशाली का मामला एक अनसुलझी गुमशुदगी का मामला बना हुआ था, उसका परिवार न्याय की आस लगाए बैठा था। दुर्वास पुलिस को उस स्थान पर ले गया। खुदाई के बाद वहां से एक कंकाल मिला, जिसकी डीएनए जांच ने पुष्टि कर दी कि यह वैशाली ओम्बले के अवशेष थे।
लेकिन दुर्वास का कबूलनामा यहीं थमा नहीं। उसने एक तीसरे अपराध का भी भंडाफोड़ किया। फरवरी 2022 में, उसने एक और महिला की हत्या कर दी थी, जिसकी पहचान अभी तक सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार, दुर्वास ने बताया कि वह महिला उसे एक स्थानीय पार्टी में मिली थी और बाद में उसने उसे मार डाला। इस मामले में भी उसने एक समान तरीका अपनाया था। यह खुलासा चौंकाने वाला था. यह कोई आवेग में की गई हत्या नहीं, बल्कि एक पैटर्न, एक सनक थी। दुर्वास पाटील एक सीरियल किलर था।

दुर्वास पाटील वर्तमान में जेल में है। उसे गिरफ्तारी के बाद से ही न्यायिक हिरासत में रखा गया है।
उसे रत्नागिरी जिला कारागार में बंद रखा गया है। भारतीय कानून के तहत, हत्या जैसे गंभीर अपराधों के मामले में आरोपी को ट्रायल पूरा होने तक जेल में ही रहना पड़ता है। यह मामला अभी कोर्ट की प्रक्रिया से गुजर रहा है। भारतीय न्यायिक प्रणाली में मामलों का निपटारा होने में समय लगता है, खासकर जब एक से ज्यादा हत्याओं जैसे जटिल मामले हों। पुलिस ने दुर्वास के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई कड़ी धाराएं लगाई हैं, जिनमें शामिल हैं:
धारा 302 (हत्या): भक्ति मयेकर, वैशाली ओम्बले और अज्ञात महिला की हत्या के लिए।
धारा 201 (सबूत मिटाना): शवों को छुपाने और नष्ट करने के लिए।
धारा 363 (अपहरण): हत्या से पहले पीड़िताओं को ले जाने के लिए।
हत्या का अभी ट्रायल चल रहा है। अदालत में सबूत पेश किए जा रहे हैं, गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। दुर्वास द्वारा दिया गया इकबालिया बयान कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सबूत है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता की जांच की जाएगी। फैसला आने में अभी काफी समय लग सकता है। अगर दुर्वास पाटील को दोषी पाया जाता है (जो कि लगभग तय माना जा रहा है क्योंकि उसने खुद अपने अपराध कबूले हैं), तो उसे उम्रकैद या मृत्युदंड की सजा मिल सकती है। अदालत को यह तय करना होगा कि इस मामले की भयावहता, निर्ममता और सीरियल प्रकृति को देखते हुए यह “दुर्लभतम में दुर्लभ” (rarest of rare) मामला है या नहीं।
समाज के लिए एक कड़वा सबक
भक्ति मयेकर हत्याकांड सिर्फ एक अपराध नहीं है। यह एक ऐसी सामाजिक बीमारी की ओर इशारा करता है जहां ‘ना’ सुनना किसी की इज्जत को ठेस पहुंचाने जैसा मान लिया जाता है। यह उस जहरीली मानसिकता की कहानी है जो स्वामित्व और हिंसा में अपना हल ढूंढती है।
भक्ति, वैशाली और वह अज्ञात महिला सिर्फ तीन नाम नहीं हैं, बल्कि तीन परिवारों का सपना थीं, जिनकी जिंदगी एक सनकी की वजह से तबाह हो गई। इस घटना ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया है और युवाओं के बीच रिश्तों, गुस्से और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर गंभीर बहस छेड़ दी है। ताकि भविष्य में ऐसी दूसरी भक्ति और वैशाली को बचाया जा सके। दुर्वास पाटील कानून के कठघरे में खड़ा है, और पूरा समाज न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।





इससे कानून के उपर की और विश्वासनीता बढेगीl
इसे और कानून के उपर की विश्वासनियता बढेगी |