क्या आप जानते हैं? संसार की एकमात्र चीज़ जो कभी पुरानी नहीं पड़ती: मौत की सच्चाई

क्या आप जानते हैं संसार की एकमात्र चीज़ जो कभी पुरानी नहीं पड़ती? मौत की यह सच्चाई आपको हर पल को भरपूर जीने की प्रेरणा देगी। पढ़िए और अपना जीवन बदलिए।

सबसे बड़ा सवाल

अगर मैं आपसे पूछूँ कि इस दुनिया में ऐसी कौन सी चीज़ है जो कभी पुरानी नहीं पड़ती, तो आप क्या जवाब देंगे? सोना? हीरा? प्यार? सच्चाई?

नहीं।

संसार की एकमात्र चीज़ जो कभी पुरानी नहीं पड़ती, वह है मौत। हर बार नई, हर पल ताज़ा। क्योंकि जिसे यह छूती है, वह उसी क्षण हमेशा के लिए थम जाता है। कोई इसे दोबारा अनुभव नहीं कर पाता। हर बार यह पहली बार होती है और आखिरी बार भी।

यह बात सुनकर शायद आपको अजीब लगे। डर भी लगे। लेकिन अगर आप इस सच्चाई को समझ लें, तो आपकी ज़िंदगी का नज़रिया पूरी तरह बदल जाएगा। यह लेख उसी बदलाव के बारे में है।

मौत को समझना ज़रूरी क्यों है?

हम सब मौत से डरते हैं। इस विषय पर बात करने से कतराते हैं। लेकिन सच यह है कि मौत को समझे बिना जीवन को समझना नामुमकिन है।

जापान में एक परंपरा है जिसे “Memento Mori” कहते हैं (हालाँकि यह लैटिन शब्द है, लेकिन जापानी संस्कृति में भी इसी तरह की सोच है)। इसका मतलब है “याद रखो कि तुम्हें मरना है।” यह निराशावादी विचार नहीं है। यह सबसे बड़ी प्रेरणा है।

जब आपको पता है कि समय सीमित है, तो आप हर पल की कद्र करते हैं। आप फालतू की बहस में समय बर्बाद नहीं करते। आप नफरत को दिल में नहीं रखते। आप प्यार को टालते नहीं।

वह रात जिसने मेरी सोच बदल दी

मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताता हूँ।

तीन साल पहले, मेरे एक करीबी दोस्त का एक्सीडेंट हो गया। वह सुबह घर से निकला था ऑफिस जाने के लिए। शाम को उसकी खबर आई। अस्पताल में था। गंभीर हालत में।

मैं भागा भागा अस्पताल पहुँचा। ICU के बाहर उसके परिवार वाले रो रहे थे। डॉक्टर ने कहा था कि रात बहुत कठिन है। बच गया तो ठीक, वरना…

उस रात मैं अस्पताल के बाहर बैठा था। सोच रहा था कि कल तक जो दोस्त मुझसे फोन पर बात कर रहा था, हँस रहा था, योजनाएँ बना रहा था, आज ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।

सुबह 5 बजे डॉक्टर बाहर आया। उसने कहा, “खतरा टल गया है।”

वह बच गया। लेकिन मैं बदल गया।

उस रात के बाद मैंने तय किया कि मैं अपनी ज़िंदगी बदलूँगा। जो काम टाल रहा था, वो करूँगा। जो रिश्ते सुधारने थे, वो सुधारूँगा। जो कहना था, वो कहूँगा।

क्योंकि मुझे समझ आ गया था कि मौत किसी को भी, कभी भी आ सकती है। और जब वह आए, तो मेरे पास कोई अफसोस न हो।

संत कबीर का वह दोहा जो आज भी सच है

संत कबीर ने सैकड़ों साल पहले कहा था:

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।”

और एक और:

कल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब।”

कबीर साहब कह रहे हैं कि माला तो हम रोज़ घुमाते हैं, लेकिन मन नहीं बदलता। असली बदलाव मन में चाहिए। और वो बदलाव तभी आएगा जब हम समझेंगे कि समय कितना कीमती है।

जो काम कल का है, उसे आज करो। जो आज का है, उसे अभी करो। क्योंकि “कल” का कोई भरोसा नहीं। “अभी” ही असली समय है।

तीन लोगों की कहानियाँ जो आपको झकझोर देंगी

1. वह CEO जिसने सब कुछ छोड़ दिया

राजेश (बदला हुआ नाम) एक बड़ी कंपनी के CEO थे। पैसा था, शोहरत थी, गाड़ी-बंगला सब कुछ था। लेकिन समय नहीं था। न बीवी के लिए, न बच्चों के लिए, न खुद के लिए।

एक दिन उनके पिताजी की तबीयत खराब हुई। वे अस्पताल पहुँचे। पिताजी ने आखिरी साँस लेते हुए कहा, “बेटा, तुमसे बस यही कहना था कि मुझे तुम पर गर्व है। पर तुम इतने व्यस्त रहे कि मैं यह कह ही नहीं पाया।”

पिताजी चले गए। राजेश वहीं टूट गए।

अगले महीने उन्होंने CEO की नौकरी छोड़ दी। एक छोटा सा काम शुरू किया जिसमें समय मिलता था। आज वे कम पैसे कमाते हैं, लेकिन ज़्यादा खुश हैं। क्योंकि अब वे जी रहे हैं, सिर्फ काम नहीं कर रहे।

2. वह युवक जो सपने पूरे करना चाहता था

अमित 28 साल का था। उसका सपना था दुनिया घूमने का। लेकिन वह सोचता रहा कि पहले पैसे कमा लूँ, फिर घूमूँगा। पहले घर ले लूँ, फिर घूमूँगा। पहले शादी कर लूँ, फिर घूमूँगा।

एक दिन उसे कैंसर का पता चला। स्टेज 3। डॉक्टर ने कहा कि इलाज हो सकता है, लेकिन 6 महीने बहुत मुश्किल होंगे।

उसने तय किया कि वह अपने आखिरी दिन अस्पताल में नहीं, बल्कि सपने पूरे करते हुए बिताएगा। उसने लोन लिया और विदेश जाने का टिकट बुक कर लिया।

वह 4 महीने घूमा। थाईलैंड, यूरोप, अमेरिका। तस्वीरें खींचीं, नए लोगों से मिला, नए अनुभव किए।

आज अमित ठीक है। कैंसर हार गया। लेकिन असली जीत तो उसकी सोच की थी। उसने मौत को देखकर जीना सीख लिया।

3. वह दादी जो हर दिन जश्न मनाती थीं

मेरी पड़ोस में एक 75 साल की दादी रहती थीं। हर सुबह 6 बजे उनके घर से भजन की आवाज़ आती थी। हर शाम वे बच्चों को कहानियाँ सुनातीं। हर रविवार को वे गरीबों को खाना खिलातीं।

एक दिन मैंने उनसे पूछा, “दादी, आप इतनी ऊर्जा कहाँ से लाती हैं?”

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, मैं हर दिन को अपनी ज़िंदगी का आखिरी दिन मानती हूँ। सोचती हूँ कि अगर कल नहीं आया, तो आज का दिन पूरा जी लूँ। इसलिए मैं हर पल को खुशी से जीती हूँ।”

दो साल बाद वे चल बसीं। लेकिन उनकी मौत पर कोई रोया नहीं। सबने जश्न मनाया। क्योंकि उन्होंने अपनी ज़िंदगी पूरी तरह जी ली थी। कोई अफसोस नहीं, कोई शिकायत नहीं।

स्वामी विवेकानंद का संदेश

स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “Arise, awake and stop not till the goal is reached” – उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।

विवेकानंद जी केवल 39 साल जीए। लेकिन उन 39 सालों में उन्होंने इतना काम किया कि आज भी पूरी दुनिया उन्हें याद करती है। उन्होंने भारत का नाम रोशन किया, हिंदू धर्म को नई पहचान दी, हज़ारों युवाओं को प्रेरित किया।

कैसे? क्योंकि उन्हें पता था कि समय कम है और काम बहुत।

उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि “बाद में करूँगा।” उन्होंने हमेशा “अभी” पर भरोसा किया।

मौत की सच्चाई

मौत से सीखी हुई 7 सबक

अब मैं आपको वो 7 बातें बताता हूँ जो मौत हमें सिखाती है:

1. रिश्ते सबसे कीमती हैं

पैसा, शोहरत, गाड़ी, बंगला – यह सब यहीं रह जाएगा। साथ जाएंगे तो बस यादें। इसलिए रिश्तों में समय लगाइए। अपने माता-पिता से बात करिए। भाई-बहनों से मिलिए। दोस्तों को समय दीजिए।

2. माफी माँगना और माफ करना सीखें

ज़िंदगी छोटी है नफरत के लिए। किसी से नाराज़ हैं? माफ कर दीजिए। खुद से गलती हुई है? माफी माँग लीजिए। मौत आने से पहले दिल हल्का कर लीजिए।

3. सपने अभी पूरे करें

“बाद में” कभी नहीं आता। जो करना है वो अभी करें। घूमना है? जाइए। लिखना है? लिखिए। गाना है? गाइए। इंतज़ार किस बात का?

4. छोटी खुशियों में जीवन है

बारिश की पहली बूँद, चाय की चुस्की, बच्चों की हँसी, माँ का हाथ का खाना – यही असली खुशी है। इसे महसूस करना सीखिए।

5. स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है

शरीर की सुनिए। व्यायाम करिए। अच्छा खाइए। नींद पूरी लीजिए। क्योंकि अगर सेहत गई, तो सब बेकार है।

6. दूसरों की मदद करें

जब आप किसी की मदद करते हैं, तो आपका जीवन सार्थक हो जाता है। दान करिए, वक्त दीजिए, मुस्कान दीजिए। यही आपकी असली पहचान बनेगी।

7. अपने आप को जानें

मौत के डर से ऊपर उठकर, अपने आप से सवाल पूछिए: मैं कौन हूँ? मेरा उद्देश्य क्या है? मैं क्या छोड़ कर जाऊँगा?

आज से बदलाव शुरू करें

तो अब सवाल यह है कि आप क्या करेंगे? यह लेख पढ़कर वापस अपनी पुरानी ज़िंदगी में लौट जाएँगे? या कुछ बदलेंगे?

मैं आपको 5 काम बताता हूँ जो आप आज से शुरू कर सकते हैं:

1. एक फोन कॉल करें: जिससे बहुत दिनों से बात नहीं की, उसे फोन करें। बस पूछें कि कैसे हो? यकीन मानिए, वो खुश हो जाएगा।

2. माफी माँगें: किसी से गलती हो गई है? कह दीजिए “सॉरी।” अहंकार छोड़िए, रिश्ता बचाइए।

3. एक छोटा सपना पूरा करें: कोई किताब खरीदनी थी? खरीद लीजिए। कहीं घूमना था? प्लान बना लीजिए।

4. किसी की मदद करें: किसी गरीब को खाना खिलाइए। किसी को रास्ता दिखाइए। किसी की बात सुनिए।

5. शुक्रगुज़ार बनें: अपने जीवन में जो अच्छा है, उसकी तारीफ करें। स्वस्थ शरीर, प्यारा परिवार, छत, खाना – यह सब वरदान है।

आखिरी बात

दोस्तों, मौत एक सच्चाई है। इससे कोई बच नहीं सकता। न राजा, न रंक, न अमीर, न गरीब। सबको एक दिन जाना है।

लेकिन इस सच्चाई में ही छुपा है जीवन का सबसे बड़ा संदेश: जब तक हो, तब तक जी भर के जीओ।

मौत की याद आपको डराने के लिए नहीं, जगाने के लिए है। यह आपको बताने के लिए है कि समय बहुत कीमती है। इसे फालतू की बातों में, बेकार के झगड़ों में, बेमतलब के अफसोस में मत गँवाओ।

आज का दिन वह तोहफा है जो आपको मिला है। कल का भरोसा नहीं। इसलिए आज को पूरी ताकत से जीओ। प्यार से जीओ। हँसी से जीओ। मदद से जीओ। उद्देश्य से जीओ।

क्योंकि एक दिन जब मौत आएगी, तो वह आपसे नहीं पूछेगी कि आपके पास कितना पैसा था, कितनी गाड़ियाँ थीं, कितना बड़ा घर था।

वह बस एक सवाल पूछेगी: क्या तुमने जीना सीखा?

और अगर आपका जवाब “हाँ” है, तो आप जीत गए।

तो आज से शुरू कीजिए। जीना सीखिए। क्योंकि मौत तो आएगी ही। लेकिन जब आए, तो आपके चेहरे पर मुस्कान हो और दिल में संतोष हो कि हाँ, मैंने जीवन को पूरी तरह जिया।

यही है मौत का सबसे बड़ा सबक।

याद रखिए: संसार की एकमात्र चीज़ जो कभी पुरानी नहीं पड़ती, वह है मौत। तो जब तक यह न आए, तब तक अपनी ज़िंदगी को ताज़ा, नया और जीवंत बनाए रखिए। हर दिन को जश्न की तरह मनाइए। क्योंकि यही असली जीवन है।

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