रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा: Oravel की असफलता से OYO की सफलता तक

रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा में Oravel की असफलता, COVID में ₹13,000 करोड़ का नुकसान और फिर रेवेन्यू शेयरिंग से OYO का 2024 में मुनाफे में आना शामिल है। जानिए पूरी प्रेरक कहानी।

जेब में 9,000 रुपये और दिल में था सपना

ओडिशा के बिस्सम कटक से दिल्ली पहुंचा एक 18 साल का लड़का। जेब में सिर्फ 9,000 रुपये। न कोई बड़ी डिग्री, न कोई कनेक्शन। लेकिन था एक सवाल जो करोड़ों भारतीयों के मन में है: “सस्ते में अच्छे होटल क्यों नहीं मिलते?”

यह सिर्फ एक सवाल नहीं था। यह एक समस्या की शुरुआत थी जिसका समाधान आज OYO के नाम से पूरी दुनिया जानती है। लेकिन रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा कोई आसान रास्ता नहीं था। यह असफलताओं, नुकसान और फिर से उठने की कहानी है।

Oravel Stays: पहला कदम, पहली ठोकर

2011 में 17 साल की उम्र में रितेश ने Oravel Stays शुरू की। आइडिया सीधा था: Airbnb की तरह बजट होटल्स को यात्रियों से जोड़ना। लेकिन सिर्फ होटल दिखाना काफी नहीं था।

समस्या यह थी कि Oravel में कोई क्वालिटी कंट्रोल नहीं था। यात्री बुकिंग करते, होटल पहुंचते, और फिर निराश होकर वापस लौट जाते। गंदे कमरे, खराब सुविधाएं, झूठे वादे। भरोसा टूटा, बिजनेस डूबने लगा।

रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा में यह पहला बड़ा झटका था। Oravel फेल हो रहा था और उन्हें समझ आ गया कि कुछ बुनियादी रूप से गलत है।

100 होटल्स का सफर: असली समाधान की खोज

ज्यादातर लोग यहीं रुक जाते हैं। लेकिन रितेश अलग थे। उन्होंने अगले 18 महीने पूरे भारत में घूमकर बिताए। 100 से ज्यादा बजट होटल्स में रुके। हर रात एक नया होटल।

वे गद्दे चेक करते, बाथरूम की सफाई देखते, Wi-Fi टेस्ट करते, और होटल मालिकों से घंटों बात करते। धीरे-धीरे असली समस्या साफ हुई:

  1. स्टैंडर्डाइजेशन की कमी – एक ही प्राइस में कहीं अच्छा तो कहीं बेकार
  2. होटल मालिकों को मार्केटिंग नहीं आती – कस्टमर कैसे लाएं, यह नहीं पता
  3. यात्रियों को भरोसे की जरूरत – सस्ता देखकर डर लगता है

रितेश को समझ आया: समाधान लिस्टिंग नहीं, बल्कि होटल्स को ठीक करना और उन्हें एक ब्रांड बनाना है। यह एहसास रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा का टर्निंग पॉइंट बना।

Thiel Fellowship: भारत से पहला चुनाव

2013 में रितेश ने Peter Thiel की फेलोशिप के लिए अप्लाई किया। यह दुनिया का सबसे मुश्किल प्रोग्राम था – 20 साल से कम उम्र के 20 युवाओं को कॉलेज छोड़कर अपने आइडिया पर काम करने के लिए $100,000 मिलते थे।

पहले कभी किसी एशियाई को यह नहीं मिला था। लेकिन फिर फोन आया: “आप टॉप 40 में सेलेक्ट हुए हैं।”

रितेश तीन हफ्ते Silicon Valley में रहे। टॉप investors से मिले। और मई 2013 में नतीजा आया: रितेश अग्रवाल भारत के पहले Thiel Fellow बने।

एक लाख डॉलर और Elon Musk, Sean Parker जैसे मेंटर्स। लेकिन असली चुनौती अभी बाकी थी।

OYO Rooms: सीखे हुए सबक का इस्तेमाल

Thiel Fellowship के साथ मई 2013 में OYO (On Your Own) Rooms लॉन्च हुआ। इस बार मॉडल पूरी तरह अलग था।

OYO सिर्फ होटल्स को लिस्ट नहीं करता था, बल्कि:

  • होटल मालिकों के साथ पार्टनरशिप करता
  • दीवारें सफेद पेंट करवाता, AC लगवाता, ब्रांडेड बेडशीट्स देता
  • स्टाफ को ट्रेनिंग देता
  • एक फिक्स्ड प्राइस रखता (शुरुआत में ₹999)
  • 22% कमीशन लेता

पहले तीन महीने: 50 होटल। एक साल में: 1,000 होटल। और रितेश की उम्र थी सिर्फ 19 साल।

SoftBank का दांव: करोड़ों की फंडिंग

2015 में SoftBank के Masayoshi Son भारत आए। रितेश से सिर्फ 15 मिनट मिले। बातचीत खत्म होते ही उन्होंने $100 मिलियन का चेक काट दिया। यह भारत का सबसे बड़ा Series A फंडिंग था।

2015 से 2018 के बीच OYO तेजी से बढ़ा:

  • कुल $3.2 बिलियन फंडिंग
  • मलेशिया, UK, चीन, इंडोनेशिया, UAE में विस्तार
  • 5 लाख रूम्स (Marriott + Hilton से भी ज्यादा)
  • वैल्यूएशन: $10 बिलियन

लेकिन यह तेज ग्रोथ एक बड़ी कीमत पर आ रही थी।

खतरनाक विस्तार: मुनाफे के बिना ग्रोथ

रितेश अग्रवाल की सबसे बड़ी गलती यही थी: बिना प्रॉफिट के एक्सपेंशन।

2019 की वित्तीय रिपोर्ट:

  • रेवेन्यू: ₹6,616 करोड़
  • खर्च: ₹8,947 करोड़
  • नुकसान: ₹2,333 करोड़

समस्याएं बढ़ने लगीं:

  • होटल मालिकों से झगड़े (मिनिमम गारंटी नहीं दे पाना)
  • मार्केटिंग पर जबरदस्त खर्च
  • कर्मचारियों की संख्या 10,000+
  • चीन, अमेरिका जैसी मार्केट्स में संघर्ष

2019-20 में OYO का सालाना नुकसान ₹13,123 करोड़ तक पहुंच गया। वैल्यूएशन भले ₹10 बिलियन थी, लेकिन हर साल हजारों करोड़ जल रहे थे।

COVID-19: सबसे अंधेरा दौर

फिर 2020 में महामारी आई। होटल इंडस्ट्री पूरी तरह ठप। लोग घरों में बंद। कोई यात्रा नहीं।

OYO पर इसका प्रभाव विनाशकारी रहा:

FY20-21 के नंबर:

  • रेवेन्यू: ₹13,168 करोड़ से गिरकर ₹4,596 करोड़ (65% गिरावट)
  • कुल नुकसान: ₹16,792 करोड़
  • ऑक्यूपेंसी: 60% से ज्यादा गिरी
  • रोजाना करोड़ों रुपये जल रहे थे

रितेश ने बाद में कहा: “मुझे लगा कि कंपनी बचेगी नहीं।” यह रितेश अग्रवाल का सबसे कठिन समय था।

मजबूर फैसले:

  • दिसंबर 2019: 2,000 लोगों की छंटनी
  • 200 शहरों से निकले (600 में से)
  • मार्च 2020: गुड़गांव के दोनों ऑफिस छोड़े
  • अप्रैल 2020: सभी कर्मचारियों की सैलरी में 25% कटौती
  • चीन में 72% स्टाफ की छंटनी

कई होटल मालिकों ने केस कर दिए। मीडिया में नकारात्मक खबरें। निवेशक परेशान। ऐसा लगा जैसे OYO की कहानी यहीं खत्म हो जाएगी।

करो या मरो: बिजनेस मॉडल बदलना पड़ा

लेकिन रितेश ने हार नहीं मानी। COVID की मजबूरी ने मूल सवाल पूछने को मजबूर किया: “हम लगातार पैसे क्यों जला रहे हैं?”

जवाब मिला: लीज मॉडल (Minimum Guarantee Model) गलत था।

पुरानी गलती:

  • OYO होटल मालिकों को हर महीने फिक्स्ड रकम देता था
  • चाहे कमरे बुक हों या न हों
  • COVID में बुकिंग बंद हुईं, लेकिन देनदारी बनी रही

2020-21 में रितेश ने नया मॉडल लॉन्च किया: Revenue Sharing

नया सिस्टम:

  • OYO होटल मालिकों को फिक्स्ड पैसे नहीं देगा
  • जितनी बुकिंग, उसमें से 20-35% कमीशन
  • होटल मालिक खुश (ज्यादा बुकिंग = ज्यादा पैसा)
  • OYO खुश (रिस्क कम, मुनाफा ज्यादा)

यह बदलाव धीरे-धीरे चमत्कार लाया। रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा में यह सबसे महत्वपूर्ण निर्णय था।

रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा

2021: उम्मीद की पहली किरण

मार्च 2021 में रितेश ने घोषणा की:

“जनवरी 2021 से हमारा Gross Profit COVID से पहले के लेवल पर वापस आ गया है।”

और भी अच्छी खबरें:

  • भारत का बिजनेस दिसंबर 2020 से EBITDA ब्रेकईवन
  • हर महीने 11,000 नए रूम जुड़ रहे हैं
  • OYO Wizard: 8.5 मिलियन मेंबर्स
  • यूरोप का Vacation Homes बिजनेस मुनाफे में

संघर्ष का सबसे कठिन दौर खत्म हो रहा था।

2022-2023: खर्चों में भारी कटौती

अगले दो साल OYO ने कॉस्ट कटिंग पर फोकस किया:

FY23 के नतीजे:

  • रेवेन्यू: ₹5,464 करोड़
  • नुकसान: ₹1,286 करोड़ (पहले से बहुत कम)
  • कर्मचारी खर्च में 52% कटौती
  • मार्केटिंग खर्च 83% कम
  • 12,938 होटल्स (क्वालिटी पर फोकस)

यह दर्दनाक था, लेकिन जरूरी। कंपनी सीख रही थी: बड़ा बनना नहीं, टिकाऊ बनना जरूरी है

2024: मुनाफे की ऐतिहासिक वापसी

11 साल बाद पहली बार OYO मुनाफे में आया।

FY24 के शानदार नतीजे:

  • रेवेन्यू: ₹5,389 करोड़
  • मुनाफा: ₹230 करोड़ (हां, प्लस में!)
  • होटल्स: 18,103 (40% बढ़ोतरी)
  • EBITDA मार्जिन: 15.5%
  • ROCE: 13.4%

यह रितेश अग्रवाल का सबसे बड़ा मोड़ था। 11 साल की मेहनत, असफलताएं और सीख के बाद आखिरकार मंजिल नजर आई।

मुनाफे के पीछे की रणनीति:

  1. रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल – अब 95% होटल्स इसी सिस्टम पर
  2. प्रीमियम होटल्स – Sunday Hotels ब्रांड लॉन्च किया
  3. टेक्नोलॉजी – AI-powered dynamic pricing, ChatGPT check-in
  4. स्पिरिचुअल ट्रैवल – अयोध्या, काशी, शिरडी में होटल्स
  5. कॉर्पोरेट क्लाइंट्स – Oravel Travel Solutions लॉन्च
  6. ग्लोबल विस्तार – Motel 6 (अमेरिका) $525 मिलियन में खरीदा

2025: भारत का सबसे मुनाफा कमाने वाला स्टार्टअप

और फिर आया सबसे बड़ा मील का पत्थर।

FY25 के रिकॉर्ड तोड़ नतीजे:

  • PAT: ₹623 करोड़ (172% बढ़ोतरी!)
  • EBITDA: ₹1,132 करोड़
  • Q3 FY25 मुनाफा: ₹166 करोड़ (पिछले साल से 6 गुना)
  • रेवेन्यू ग्रोथ: 31% (YoY)

OYO अब भारत का सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला स्टार्टअप बन गया।

रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा ने साबित कर दिया: असफलता से सीखकर, गलतियां सुधारकर, और धैर्य रखकर कोई भी बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।

आज का OYO: दुनिया में फैला साम्राज्य

आज OYO सिर्फ भारतीय कंपनी नहीं रही:

  • 35+ देशों में ऑपरेशन
  • 1,57,000+ होटल और होम स्टोरफ्रंट्स
  • Moody’s ने रेटिंग B3 से B2 पर अपग्रेड की
  • वैल्यूएशन: $2.5-3.9 बिलियन (2024)

हाल की बड़ी उपलब्धियां:

  • अगस्त 2024: CheckMyGuest (Paris) ₹230 करोड़ में खरीदा
  • सितंबर 2024: Motel 6 और Studio 6 का अधिग्रहण
  • 30+ Sunday Hotels लॉन्च (भारत, UAE, सऊदी, SE Asia)
  • OYO Wizard: 16.4 मिलियन लॉयल मेंबर्स

रितेश अग्रवाल से सीखने योग्य 7 बड़े सबक

हर उद्यमी को ये जरूरी सबक मिलते हैं:

1. असफलता आपका शिक्षक है

Oravel की असफलता ने OYO बनाना सिखाया। अगर Oravel सफल हो जाता, तो शायद OYO कभी न बनता। हर असफलता एक सबक है, बशर्ते आप सीखें।

2. समस्या को गहराई से समझें

रितेश ने 100+ होटल्स में रहकर असली समस्या समझी। ज्यादातर उद्यमी समस्या समझे बिना समाधान बना देते हैं। पहले सुनिए, फिर बनाइए।

3. तेज विकास से टिकाऊ विकास बेहतर है

OYO की सबसे बड़ी गलती: बिना मुनाफे के तेजी। हर साल हजारों करोड़ जलाना। अंत में समझ आया: स्लो एंड स्टेडी विन्स द रेस।

4. मुश्किल वक्त में बदलने की हिम्मत रखें

COVID में Minimum Guarantee से Revenue Sharing पर शिफ्ट करना बड़ा जोखिम था। लेकिन यही बदलाव OYO को बचाया। जब पुराना काम न करे, नया रास्ता बनाएं।

5. मेंटरशिप की ताकत पहचानें

Thiel Fellowship और Peter Thiel, Elon Musk जैसे मेंटर्स ने रितेश की सोच बदल दी। सही गाइडेंस साल बचा सकती है।

6. कस्टमर और पार्टनर दोनों को खुश रखें

Revenue Sharing में दोनों की जीत है: होटल मालिक खुश, OYO खुश। जब बिजनेस मॉडल सबको फायदा दे, तभी लंबे समय तक चलता है।

7. धैर्य रखें

2013 से 2024 तक – 11 साल लगे मुनाफे में आने में। बीच में करोड़ों का नुकसान, हजारों की छंटनी, महामारी का संकट। लेकिन रितेश ने हार नहीं मानी।

रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा

IPO की तैयारी और भविष्य की योजनाएं

2025 में OYO IPO के लिए तैयार है:

  • ₹1,457 करोड़ की Series G फंडिंग
  • $660 मिलियन Term Loan का रीफाइनांसिंग
  • रितेश ने खुद ₹832 करोड़ निवेश किया
  • वैल्यूएशन: $2.5-3.9 बिलियन

कंपनी ने हाल ही में अपना नाम बदलकर PRISM Life कर दिया है, जो उसके विविध बिजनेस पोर्टफोलियो को दर्शाता है। अभी खत्म नहीं हुई – यह अभी जारी है।

संघर्ष से मिली सफलता

रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा किसी फिल्म से कम नहीं है। एक छोटे शहर का लड़का, जिसके पास सिर्फ एक आइडिया और जुनून था, आज भारत के सबसे सफल युवा उद्यमियों में है।

संघर्ष के मुख्य पड़ाव:

  • 2011: Oravel Stays की शुरुआत
  • 2012: Oravel की असफलता
  • 2013: Thiel Fellowship और OYO की शुरुआत
  • 2015-2018: तेज विस्तार, बढ़ता नुकसान
  • 2019-2020: ₹13,000+ करोड़ का नुकसान
  • 2020-2021: COVID का झटका, बिजनेस मॉडल बदलाव
  • 2024: पहली बार मुनाफा ₹230 करोड़
  • 2025: ₹623 करोड़ मुनाफा, भारत का सबसे मुनाफा कमाने वाला स्टार्टअप

प्रेरणा की बात: जब रितेश 19 साल के थे और Oravel फेल हो गया, तो लोगों ने कहा: “तुम बहुत छोटे हो, छोड़ दो।” लेकिन उन्होंने नहीं छोड़ा। जब COVID में कंपनी डूब रही थी, तब भी हार नहीं मानी।

आज वे 31 साल के हैं। OYO दुनिया के 35 देशों में है। 1.5 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टीज। और सबसे बड़ी बात: हर तिमाही मुनाफा बढ़ रहा है।

रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा यह सिखाती है:

  • असफलता से डरो मत, उससे सीखो
  • धैर्य रखो और मेहनत करते रहो
  • बदलने को तैयार रहो
  • कभी हार मत मानो

क्योंकि जीत उनकी होती है जो आखिरी तक खड़े रहते हैं। रितेश अग्रवाल की संघर्ष यात्रा हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपने पूरे करना चाहता है।

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