इस कहाणी कि प्रेरणा यक्ष प्रश्न से ली गई है।
यक्ष की “सात घड़े” (या सात कलश) की कहानी एक प्राचीन भारतीय दृष्टांत है जो जीवन में संतुलन और समग्रता का गहरा संदेश देती है। यहाँ इस कहानी का सार और मुख्य संदेश है:
एक गाँव में एक नाई अपने परिवार के साथ रहता था। नाई बहुत ईमानदार था, अपनी कमाई से संतुष्ट रहता था। उसे किसी तरह का लालच नहीं था। नाई की पत्नी भी अपनी पति की कमाई हुई आय से बड़ी कुशलता से अपनी गृहस्थी चलाती थी। कुल मिलाकर उनकी जिंदगी बड़े आराम से हंसी-खुशी से गुजर रही थी।
नाई अपने काम में बहुत निपुण था। एक दिन वहाँ के राजा ने नाई को अपने पास बुलवाया और रोज उसे महल में आकर हजामत बनाने को कहा।
नाई ने भी बड़ी प्रसन्नता से राजा का प्रस्ताव मान लिया। नाई को रोज राजा की हजामत बनाने के लिए एक स्वर्ण मुद्रा मिलती थी। इतना सारा पैसा पाकर नाई की पत्नी भी बड़ी खुश हुई।
अब उसकी जिन्दगी और भी बड़े आराम से कटने लगी। घर पर किसी चीज़ की कमी नहीं रही और हर महीने अच्छी रकम की बचत भी होने लगी। नाई, उसकी पत्नी और बच्चे सभी खुश रहने लगे।
एक दिन शाम को जब नाई अपना काम निपटा कर महल से अपने घर वापस जा रहा था, तो रास्ते में उसे एक आवाज सुनाई दी। आवाज एक यक्ष की थी। यक्ष ने नाई से कहा, ‘‘मैंने तुम्हारी ईमानदारी के बड़े चर्चे सुने हैं, मैं तुम्हारी ईमानदारी से बहुत खुश हूँ और तुम्हें सोने की मुद्राओं से भरे सात घड़े देना चाहता हूँ। क्या तुम मेरे दिये हुए घड़े लोगे ?
नाई पहले तो थोड़ा डरा, पर दूसरे ही पल उसके मन में लालच आ गया और उसने यक्ष के दिये हुए घड़े लेने का निश्चय कर लिया।
नाई का उत्तर सुनकर उस आवाज ने फिर नाई से कहा, ‘‘ठीक है सातों घड़े तुम्हारे घर पहुँच जाएँगे।’’ नाई जब उस दिन घर पहुँचा, वाकई उसके कमरे में सात घड़े रखे हुए थे। नाई ने तुरन्त अपनी पत्नी को सारी बातें बताईं और दोनों ने घड़े खोलकर देखना शुरू किया। उसने देखा कि छः घड़े तो पूरे भरे हुए थे, पर सातवाँ घड़ा आधा खाली था। नाई ने पत्नी से कहा—‘‘कोई बात नहीं, हर महीने जो हमारी बचत होती है, वह हम इस घड़े में डाल दिया करेंगे। जल्दी ही यह घड़ा भी भर जायेगा। और इन सातों घड़ों के सहारे हमारा बुढ़ापा आराम से कट जायेगा।
अगले ही दिन से नाई ने अपनी दिन भर की बचत को उस सातवें में डालना शुरू कर दिया। पर सातवें घड़े की भूख इतनी ज्यादा थी कि वह कभी भी भरने का नाम ही नहीं लेता था। धीरे-धीरे नाई कंजूस होता गया और घड़े में ज्यादा पैसे डालने लगा, क्योंकि उसे जल्दी से अपना सातवाँ घड़ा भरना था।
नाई की कंजूसी के कारण अब घर में कमी आनी शुरू हो गयी, क्योंकि नाई अब पत्नी को कम पैसे देता था। पत्नी ने नाई को समझाने की कोशिश की, पर नाई को बस एक ही धुन सवार थी—सातवां घड़ा भरने की।
अब नाई के घर में पहले जैसा वातावरण नहीं था। उसकी पत्नी कंजूसी से तंग आकर बात-बात पर अपने पति से लड़ने लगी। घर के झगड़ों से नाई परेशान और चिड़चिड़ा हो गया।
एक दिन राजा ने नाई से उसकी परेशानी का कारण पूछा।
नाई ने भी राजा से कह दिया अब मँहगाई के कारण उसका खर्च बढ़ गया है।
नाई की बात सुनकर राजा ने उसका मेहताना बढ़ा दिया, पर राजा ने देखा कि पैसे बढ़ने से भी नाई को खुशी नहीं हुई, वह अब भी परेशान और चिड़चिड़ा ही रहता था।
एक दिन राजा ने नाई से पूछ ही लिया कि कहीं उसे यक्ष ने सात घड़े तो नहीं दे दिये हैं ?
नाई ने राजा को सातवें घड़े के बारे में सच-सच बता दिया।
तब राजा ने नाई से कहा कि सातों घड़े यक्ष को वापस कर दो, क्योंकि सातवां घड़ा साक्षात लोभ है, उसकी भूख कभी नहीं मिटती।
नाई को भी सारी बात समझ में आ गयी। नाई ने उसी दिन घर लौटकर सातों घड़े यक्ष को वापस कर दिये। घड़ों के वापस जाने के बाद नाई का जीवन फिर से खुशियों से भर गया।
असली “सात घड़े” दृष्टांत का मुख्य संदेश:
यह कहानी वास्तव में मानव जीवन के सात आवश्यक पहलुओं (घड़ों) के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध है:
स्वास्थ्य का घड़ा (शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य)
धन का घड़ा (आर्थिक सुरक्षा)
प्रेम का घड़ा (पारिवारिक व सामाजिक रिश्ते)
शांति का घड़ा (मन की शांति व संतोष)
ज्ञान का घड़ा (शिक्षा व अनुभव)
कर्म का घड़ा (परिश्रम व उद्देश्यपूर्ण कार्य)
आध्यात्मिकता का घड़ा (आत्मिक संतुष्टि व मूल्य)
मुख्य संदेश:
जीवन में संतुलन जरूरी है: कोई भी एक घड़ा (पहलू), चाहे वह कितना भी भरा हो (जैसे सिर्फ धन या सिर्फ कर्म), अकेले पूर्ण जीवन नहीं दे सकता। सच्ची समृद्धि तभी आती है जब सभी सात घड़े एक साथ और संतुलित रूप से भरे हों।
सभी पहलुओं का अपना महत्व है: स्वास्थ्य के बिना धन बेकार है, प्रेम के बिना शांति अधूरी है, ज्ञान के बिना कर्म निरर्थक हो सकता है। हर पहलू दूसरों को पूर्णता देता है।
“कमियाँ” भी विशेषता बन सकती हैं: जिस घड़े को अपनी कमी का एहसास था, उसी ने फूलों को जीवन दिया। इसी तरह, जीवन की प्रतीत होने वाली कमजोरियाँ या अलग होना भी कई बार विशेष योगदान दे सकता है।
समग्र दृष्टिकोण: जीवन को किसी एक पैमाने (जैसे सिर्फ पैसा या सिर्फ सफलता) से नहीं आँकना चाहिए। सच्ची सफलता और खुशहाली तब मिलती है जब हम अपने जीवन के सभी आयामों को विकसित और पोषित करते हैं।
पूर्णता की खोज: खाली घड़ा अधूरापन दर्शाता है। यह हमें अपने जीवन के उन क्षेत्रों पर ध्यान देने का संकेत देता है जो उपेक्षित रह गए हैं।
संक्षेप में: यक्ष की सात घड़ों की कहानी का मूल संदेश यह है कि एक सार्थक, संपन्न और खुशहाल जीवन जीने के लिए स्वास्थ्य, धन, प्रेम, शांति, ज्ञान, कर्म और आध्यात्मिकता – इन सातों पहलुओं में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। किसी एक को भी नज़र अंदाज़ करने से जीवन अधूरा रह जाता है। यह कहानी हमें जीवन की “पूर्णता” की ओर देखने का दृष्टिकोण देती है।




