जब एक शेयर ट्रेडर ने भारत की सबसे बड़ी रिटेल चेन खड़ी कर दी: राधाकिशन दमानी की प्रेरक कहानी

राधाकिशन दमानी की प्रेरणादायक कहानी – कैसे मुंबई के एक कमरे वाले फ्लैट से निकलकर उन्होंने डी-मार्ट की स्थापना की और भारत के सबसे अमीर उद्यमियों में शामिल हुए। संघर्ष से सफलता तक का सफर।

आज जब आप किसी भी भारतीय शहर में घूमते हैं, तो आपको हर गली-मोहल्ले में डी-मार्ट की दुकानें दिखाई देती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस विशाल रिटेल साम्राज्य के पीछे किसकी मेहनत और दूरदर्शिता है? राधाकिशन दमानी की कहानी एक ऐसे शख्स की है जिसने मुंबई के एक छोटे से फ्लैट से निकलकर भारत का तीसरा सबसे बड़ा रिटेल चेन खड़ा किया।

साधारण शुरुआत से असाधारण सफलता तक

राधाकिशन दमानी का जन्म 1954 में राजस्थान के बीकानेर में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनका परिवार मुंबई के एक छोटे से एक कमरे के फ्लैट में रहता था। हालात इतने मुश्किल थे कि कभी-कभी घर में दो वक्त की रोटी का भी इंतजाम करना मुश्किल हो जाता था। उनके पिता दलाल स्ट्रीट पर स्टॉक ब्रोकर थे, लेकिन आमदनी बहुत सीमित थी।

दमानी ने मुंबई यूनिवर्सिटी से कॉमर्स की पढ़ाई शुरू की, लेकिन पहले साल के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उन्होंने बॉल-बेयरिंग का छोटा-मोटा व्यापार शुरू किया। लेकिन जब वे सिर्फ 32 साल के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया। परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।

शेयर बाजार की दुनिया में कदम

पिता की मृत्यु के बाद राधाकिशन दमानी ने अपना बॉल-बेयरिंग का कारोबार बंद करके शेयर बाजार में कदम रखा। उन्हें शेयर बाजार के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं थी। शुरुआत में उन्होंने सिर्फ देखा-देखी में काम किया, लेकिन जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि सिर्फ दूसरों के लिए दलाली करने से पैसा नहीं बनेगा।

चंद्रकांत संपत जैसे निवेशकों से प्रेरणा लेकर उन्होंने लॉन्ग-टर्म वैल्यू इन्वेस्टिंग की रणनीति अपनाई। 1990 के दशक में जब हर्षद मेहता ने शेयर बाजार में घोटाले किए, तब दमानी ने उन कृत्रिम रूप से बढ़े शेयरों को शॉर्ट-सेल किया और करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया। उन्होंने बाद में खुद स्वीकार किया कि अगर वे अपने शेयर एक हफ्ते देर से बेचते तो दिवालिया हो जाते।

रिटेल की दुनिया में प्रवेश और शुरुआती चुनौतियां

1990 के दशक के अंत में, जब राधाकिशन दमानी शेयर बाजार में अच्छा-खासा पैसा कमा चुके थे, तब उन्हें लगा कि सिर्फ निवेश करने से संतुष्टि नहीं मिल रही। वे कुछ ऐसा बनाना चाहते थे जो उनका अपना हो।

1999 में, उन्होंने नेरुल में अपना बाजार नाम के एक सहकारी डिपार्टमेंट स्टोर की फ्रेंचाइजी ली। लेकिन उन्हें इसका बिजनेस मॉडल पसंद नहीं आया। उन्होंने देखा कि भारतीय मध्यम वर्ग को किफायती दामों पर अच्छी क्वालिटी का सामान चाहिए, लेकिन कोई भी रिटेल चेन यह नहीं दे पा रही थी।

डी-मार्ट की शुरुआत: संघर्ष और धैर्य की परीक्षा

2000 में एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड की स्थापना की गई और 2002 में मुंबई के पोवाई में पहला डी-मार्ट स्टोर खोला गया। यह दमानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था।

शुरुआत आसान नहीं थी। उस समय भारतीय रिटेल सेक्टर में बिग बाजार, सुभिक्षा और रिलायंस फ्रेश जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से मौजूद थे। इन कंपनियों ने आक्रामक विस्तार की रणनीति अपनाई थी। लेकिन दमानी ने अलग रास्ता चुना।

चुनौतियां जो उन्हें झेलनी पड़ीं:

1. पूंजी की समस्या: शुरुआती दौर में फंडिंग जुटाना बहुत मुश्किल था। निवेशक रिटेल बिजनेस को जोखिम भरा मानते थे।

2. कड़ी प्रतिस्पर्धा: बिग बाजार और सुभिक्षा की तरह बड़े खिलाड़ियों के सामने टिकना आसान नहीं था।

3. रियल एस्टेट की चुनौती: ज्यादातर रिटेलर किराए पर दुकानें लेते थे, लेकिन दमानी ने जमीन खरीदने का फैसला किया। इसके लिए बहुत ज्यादा पूंजी चाहिए थी।

4. सप्लाई चेन मैनेजमेंट: किफायती दामों पर माल उपलब्ध कराना और फिर भी मुनाफा कमाना एक बड़ी चुनौती थी।

जो रणनीति बाकियों से अलग थी

दमानी ने अपने लिए एक अनोखा बिजनेस मॉडल तैयार किया जो राधाकिशन दमानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है:

1. हाई वॉल्यूम, लो मार्जिन

दमानी का मानना था कि अगर आप बड़ी मात्रा में सामान बेच सकें तो कम मुनाफे पर भी अच्छा व्यापार हो सकता है। उन्होंने हर प्रोडक्ट पर सिर्फ 7-10% मार्जिन रखा, जबकि बाकी रिटेलर्स 15-20% मार्जिन लेते थे।

2. रियल एस्टेट का मालिकाना हक

सबसे बड़ा और सबसे अलग फैसला यह था कि दमानी ने अपने स्टोर्स के लिए जमीन खरीदी, किराए पर नहीं ली। शुरुआती दौर में यह बहुत जोखिम भरा था, क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा पूंजी लग गई। लेकिन लंबे समय में यही फैसला डी-मार्ट की सफलता का सबसे बड़ा कारण बना। किराए का खर्च बचने से उनका ऑपरेटिंग कॉस्ट बहुत कम हो गया।

3. सादगी और कम खर्च

दमानी ने स्टोर्स में फैंसी सजावट नहीं की। कोई एयर कंडीशनिंग नहीं थी (सिर्फ फूड सेक्शन में), न ही कोई बड़ा विज्ञापन अभियान। उनका मानना था कि यह सब खर्च आखिर में ग्राहक को ही चुकाना पड़ता है।

4. डायरेक्ट सोर्सिंग

बिचौलियों को हटाकर सीधे निर्माताओं से सामान खरीदना शुरू किया। इससे कीमतें और भी कम हो गईं।

5. धीमा लेकिन स्थिर विस्तार

जहां बिग बाजार और सुभिक्षा हर साल दर्जनों स्टोर खोल रहे थे, वहीं दमानी ने धैर्य दिखाया। 2002 से 2010 तक सिर्फ 25 स्टोर खोले गए। उन्होंने हर स्टोर को मुनाफे में लाने के बाद ही अगला स्टोर खोला।

संकट के समय में भी डटे रहे

दमानी के जीवन में सबसे बड़ी सीख यह है कि उन्होंने मुश्किल समय में भी अपनी रणनीति नहीं बदली।

2008 की वैश्विक मंदी के दौरान जब कई रिटेल कंपनियां डूब रही थीं, तब डी-मार्ट ने अपनी सादगी और कम खर्च की वजह से न सिर्फ टिके रहे बल्कि धीरे-धीरे बढ़ते भी रहे।

बिग बाजार और सुभिक्षा जैसी कंपनियां जो कभी बाजार की दिग्गज थीं, वे कर्ज के बोझ तले दब गईं। लेकिन दमानी ने कभी भी कर्ज नहीं लिया। उनकी कंपनी लगभग डेट-फ्री थी।

सफलता की उड़ान

2013 तक डी-मार्ट के 65 स्टोर हो चुके थे और यह महाराष्ट्र और गुजरात के बाहर भी विस्तार कर रहा था। 2016 में 112 स्टोर हो गए। अब कंपनी आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में भी फैल चुकी थी।

2017 में जब डी-मार्ट का आईपीओ आया, तो यह 104 गुना ओवरसब्स्क्राइब हुआ। शेयर की लिस्टिंग कीमत ₹604.40 थी जबकि इश्यू प्राइस सिर्फ ₹299 था। यह 102% का लाभ था। इस आईपीओ से राधाकिशन दमानी की नेटवर्थ $16.5 बिलियन हो गई और वे दुनिया के 117वें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए।

आज की स्थिति

आज डी-मार्ट के 415 से अधिक स्टोर्स हैं जो 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं। कंपनी का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक है। दमानी की नेटवर्थ $31.5 बिलियन (लगभग ₹2.6 लाख करोड़) है और वे भारत के छठे सबसे अमीर व्यक्ति हैं।

2024 में कंपनी का सालाना रेवेन्यू ₹50,000 करोड़ से अधिक हो चुका है। डी-मार्ट लगातार मुनाफे में है और इसका EBITDA मार्जिन 7-8% के आसपास रहता है, जो रिटेल इंडस्ट्री में बहुत अच्छा माना जाता है।

राधाकिशन दमानी का व्यक्तित्व

राधाकिशन दमानी सिर्फ पैसे की नहीं, बल्कि मूल्यों की भी कहानी है। दमानी को “मिस्टर व्हाइट एंड व्हाइट” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि वे हमेशा सफेद शर्ट और सफेद पैंट पहनते हैं।

वे बेहद सादा जीवन जीते हैं। मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहते हैं। अपने को बहुत पढ़ा-लिखा नहीं मानते, लेकिन व्यावहारिक ज्ञान में माहिर हैं। राकेश झुनझुनवाला जैसे दिग्गज निवेशक उन्हें अपना गुरु मानते थे।

सीख जो हम ले सकते हैं

  1. धैर्य सबसे बड़ा हथियार है: दमानी ने कभी भी जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने धीमा लेकिन स्थिर विकास चुना।
  2. कम खर्च में महारत: फैंसी दिखावे की बजाय असली वैल्यू देने पर ध्यान दें।
  3. कर्ज से बचें: दमानी ने कभी कर्ज नहीं लिया। यही कारण है कि मंदी में भी वे टिके रहे।
  4. ग्राहक को समझें: भारतीय मध्यम वर्ग को क्या चाहिए, यह समझना जरूरी है।
  5. लॉन्ग-टर्म सोचें: आज का मुनाफा कम हो सकता है, लेकिन 10-20 साल बाद का नतीजा शानदार होगा।
  6. सादगी में ही सफलता है: जरूरत से ज्यादा सजावट और विज्ञापन पर पैसा बर्बाद न करें।

राधाकिशन दमानी का निवेश पोर्टफोलियो

दमानी सिर्फ रिटेल के राजा नहीं हैं, बल्कि एक शानदार निवेशक भी हैं। उनके निवेश पोर्टफोलियो में 14 कंपनियों के शेयर हैं जिनकी कुल वैल्यू ₹2 लाख करोड़ से अधिक है।

उन्होंने HDFC बैंक, VST इंडस्ट्रीज, इंडिया सीमेंट्स, ब्लू डार्ट, सुंदरम फाइनेंस, 3M इंडिया, जुबिलेंट फूडवर्क्स जैसी कंपनियों में निवेश किया है। इन सभी निवेशों से उन्हें करोड़ों का मुनाफा हुआ है।

परिवार और व्यक्तिगत जीवन

राधाकिशन दमानी की पत्नी का नाम श्रीकांतादेवी दमानी है। उनकी तीन बेटियां हैं – मंजरी चंदक, ज्योति कबरा और मधु चंदक। मंजरी एवेन्यू सुपरमार्ट्स की डायरेक्टर हैं।

दमानी अपने परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं। 2023 में उन्होंने मुंबई के थ्री सिक्स्टी वेस्ट लक्जरी अपार्टमेंट में 28 फ्लैट ₹1,238 करोड़ में खरीदे।

भविष्य की योजनाएं

डी-मार्ट अब ऑनलाइन सेगमेंट में भी बढ़ रहा है। डी-मार्ट रेडी नाम की ऑनलाइन सर्विस 18 शहरों में उपलब्ध है। कंपनी धीरे-धीरे नए राज्यों में भी विस्तार कर रही है।

राधाकिशन दमानी की कहानी बताती है कि अगर आप सही दिशा में मेहनत करें, धैर्य रखें और अपने मूल्यों पर टिके रहें तो सफलता जरूर मिलती है।

राधाकिशन दमानी की जिंदगी यह साबित करती है कि सफलता के लिए डिग्री की नहीं, दूरदर्शिता की जरूरत होती है। मुंबई के एक छोटे से फ्लैट से निकलकर भारत के सबसे अमीर लोगों में शामिल होना कोई आसान काम नहीं था।

उन्होंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। पिता की मौत, बिजनेस की शुरुआती मुश्किलें, प्रतिस्पर्धा का दबाव – सब कुछ झेला। लेकिन हर बार वे अपनी सादगी, मेहनत और धैर्य के साथ वापस आए।

आज जब आप डी-मार्ट में खरीदारी करते हैं, तो याद रखिए कि यह सिर्फ एक रिटेल स्टोर नहीं है। यह एक शख्स के सपनों, संघर्षों और सफलता की कहानी है। यह राधाकिशन दमानी की प्रेरणादायक कहानी है जो हमें सिखाती है कि असंभव कुछ भी नहीं है।

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