श्रीधर वेम्बू कौन हैं: Arattai और Zoho के मालिक जो गांव में रहकर चैलेंज करते हैं WhatsApp को #sridharvembu

श्रीधर वेम्बू कौन हैं? जानिए Arattai और Zoho के संस्थापक की पूरी कहानी – कैसे गांव में रहकर बनाया 50,000 करोड़ का साम्राज्य और WhatsApp को दे रहे टक्कर। Sridhar Vembu की प्रेरणादायक जीवनी।

जब अरबपति ने सिलिकॉन वैली छोड़ गांव को चुना

आज पूरा भारत एक नाम की चर्चा कर रहा है – श्रीधर वेम्बू। जब Arattai नाम का एक भारतीय ऐप WhatsApp को टक्कर देने लगा और सरकारी मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे एंडोर्स किया, तो लोगों ने पूछना शुरू किया – श्रीधर वेम्बू कौन हैं? यह कोई साधारन टेक फाउंडर नहीं हैं, बल्कि 50,000 करोड़ रुपये की संपत्ति वाला वो शख्स है जिसने सिलिकॉन वैली छोड़कर तमिलनाडु के एक छोटे से गांव को अपना ठिकाना बनाया। यह कहानी है उस भारतीय अरबपति की जो गांव से दुनिया को चैलेंज कर रहा है।

कौन हैं श्रीधर वेम्बू?

श्रीधर वेम्बू 1968 में तमिलनाडु के थंजावुर जिले में पैदा हुए एक भारतीय अरबपति व्यवसायी हैं। वे Zoho Corporation के संस्थापक और पूर्व CEO हैं, और अब Arattai ऐप के कारण पूरे भारत में चर्चा में हैं। फोर्ब्स के अनुसार, 2024 में वे 5.85 बिलियन डॉलर की नेट वर्थ के साथ भारत के 39वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं।

Arattai: WhatsApp को भारतीय चुनौती

सितंबर-अक्टूबर 2025 में Arattai अचानक वायरल हो गया जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे “Made in India” WhatsApp के विकल्प के रूप में एंडोर्स किया। Arattai का मतलब तमिल में “बातचीत” होता है। इस ऐप के नए साइनअप 3,000 प्रति दिन से बढ़कर 3,50,000 प्रति दिन हो गए – यानी 100 गुना वृद्धि!

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हाल ही में Zoho Mail को अपने आधिकारिक संचार के लिए अपनाया, जिससे वेम्बू और उनकी कंपनी की साख और बढ़ गई।

लेकिन उनकी पहचान सिर्फ पैसे या Arattai से नहीं, बल्कि उनकी सोच से बनती है। 2021 में उन्हें भारत सरकार ने वाणिज्य और उद्योग में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया।

Zoho Corporation: बिना फंडिंग का अरबों का साम्राज्य

Zoho Corporation एक भारतीय बहुराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी कंपनी है जो क्लाउड-आधारित बिज़नेस सॉफ्टवेयर बनाती है। इसके मुख्य उत्पादों में वर्कप्लेस प्रोडक्टिविटी और कोलैबोरेशन सॉफ्टवेयर, कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट (CRM) सॉफ्टवेयर और बिज़नेस मैनेजमेंट टूल्स शामिल हैं।

कंपनी की स्थापना 1996 में श्रीधर वेम्बू और टोनी थॉमस ने न्यू जर्सी में AdventNet, Inc. के रूप में की थी। Zoho का मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में है और इसके 80 देशों में कार्यालय हैं, जबकि इसका US मुख्यालय ऑस्टिन, टेक्सास में स्थित है।

सबसे खास बात? Zoho यूनिकॉर्न होने के बावजूद पूरी तरह से बूटस्ट्रैप्ड है – यानी वेम्बू और उनके सह-संस्थापक टोनी थॉमस ने बाहरी प्रभाव से बचने के लिए किसी बाहरी फंडिंग नहीं ली। यह आज के स्टार्टअप युग में एक बेमिसाल उदाहरण है। जब हर कोई वेंचर कैपिटल के पीछे भाग रहा है, वेम्बू ने अपनी शर्तों पर कंपनी बनाई।

Zoho की स्थापना 1996 में एक अपार्टमेंट में हुई थी, और अब इसमें 15,000 से अधिक कर्मचारी हैं और सालाना 1 बिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व है।

गांव में रहकर चलाते हैं अरबों की कंपनी

श्रीधर वेम्बू की सबसे दिलचस्प बात यह है कि वे तमिलनाडु के मधलमपुरम (Mathalamparai) नाम के एक छोटे से गांव में रहते हैं। यह कोई सप्ताहांत की छुट्टी नहीं है, बल्कि उनका स्थायी निवास है। वहीं से वे अपनी अरबों डॉलर की वैश्विक कंपनी चलाते हैं।

यह निर्णय सिर्फ भावुकता नहीं था। वेम्बू का मानना है कि असली भारत गांवों में बसता है और विकास वहीं से होना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में Zoho के कार्यालय खोले और वहां के युवाओं को रोजगार दिया। यह उनके विकेंद्रीकृत विकास के दर्शन का हिस्सा है।

श्रीधर वेम्बू कौन हैं

शिक्षा और करियर: IIT से Princeton तक

वेम्बू ने IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। इसके बाद वे अमेरिका गए जहां उन्होंने Princeton University से MS और PhD की डिग्री हासिल की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि मजबूत थी, लेकिन उनकी असली प्रतिभा व्यवसाय में निखरी।

व्यवसाय का सफर: AdventNet से Zoho तक

1990 के दशक में, जब भारत में सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनियां बूम कर रही थीं, वेम्बू ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने प्रोडक्ट कंपनी बनाने का फैसला किया, जो उस समय काफी जोखिम भरा था।

1996 में उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर AdventNet शुरू किया। शुरुआत में यह नेटवर्क मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर बनाती थी। धीरे-धीरे कंपनी बढ़ी और 2009 में इसका नाम Zoho Corporation रखा गया।

आज Zoho के पास 45 से अधिक सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन हैं जो छोटे व्यवसायों से लेकर बड़ी कंपनियों तक सभी के लिए समाधान प्रदान करते हैं। यह Microsoft और Google जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर देता है।

वेम्बू की अनोखी कंपनी संस्कृति

श्रीधर वेम्बू की सबसे बड़ी खासियत उनकी सोच है। उनका मानना है कि सॉफ्टवेयर बनाना छोटी टीमों में, अनौपचारिक माहौल में सबसे अच्छा होता है। सिर्फ नंबर और मेट्रिक्स-आधारित दृष्टिकोण रचनात्मकता को नष्ट करते हैं और बेजान उत्पाद बनाते हैं।

यही कारण है कि Zoho में कोई HR डिपार्टमेंट नहीं है। कंपनी में पदानुक्रम कम है और कर्मचारियों को स्वतंत्रता दी जाती है। वेम्बू का मानना है कि अच्छे लोग अच्छे उत्पाद बनाते हैं, और अच्छे लोगों को विश्वास और स्वतंत्रता चाहिए, न कि माइक्रो-मैनेजमेंट।

Zoho University: डिग्री के बिना करियर

2005 में वेम्बू ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया। उन्होंने Zoho University प्रोग्राम शुरू किया, जहां हाई स्कूल के छात्रों को बिना कॉलेज भेजे सीधे ट्रेनिंग दी जाती है। यह प्रोग्राम उन युवाओं के लिए है जो कॉलेज नहीं जा सकते या नहीं जाना चाहते।

यह कार्यक्रम आज भी चल रहा है और सैकड़ों युवाओं को रोजगार दे चुका है। वेम्बू का मानना है कि असली शिक्षा व्यावहारिक होनी चाहिए, न कि सिर्फ सैद्धांतिक।

ग्रामीण विकास में योगदान

महामारी के दौरान जब पूरा देश लॉकडाउन में था, वेम्बू ने अपने गांव और आसपास के इलाकों में 30,000 लोगों को रोजाना मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया। यह उनके सामाजिक सरोकार का एक उदाहरण है।

वे ग्रामीण इलाकों में Zoho के दफ्तर खोलते हैं ताकि वहां के युवाओं को शहर जाने की जरूरत न पड़े। उनका मानना है कि भारत की असली ताकत उसके गांवों में है और विकास वहीं से होना चाहिए।

सम्मान और पुरस्कार

वेम्बू को उनके काम के लिए कई पुरस्कार मिल चुके हैं:

  • 2021 में पद्म श्री (भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार)
  • 2019 में Ernst & Young का “Entrepreneur of the Year Award”
  • 2022 में CNN-News18 Indian of the Year
  • 2021 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड में नियुक्ति

वेम्बू का जीवन दर्शन

श्रीधर वेम्बू की सफलता की कहानी सिर्फ पैसे कमाने की कहानी नहीं है। यह एक अलग तरह से सोचने, अपनी शर्तों पर जीने और समाज को वापस देने की कहानी है। वे साबित करते हैं कि:

1. बाहरी फंडिंग जरूरी नहीं: अगर आपका प्रोडक्ट अच्छा है और आप धैर्य रख सकते हैं, तो आप बिना वेंचर कैपिटल के भी बड़ी कंपनी बना सकते हैं।

2. गांव से भी दुनिया जीती जा सकती है: आपको सिलिकॉन वैली या बेंगलुरु में होना जरूरी नहीं है। अच्छा काम कहीं से भी किया जा सकता है।

3. लंबी दौड़ का खेल: वेम्बू ने रातोंरात सफलता नहीं पाई। उन्होंने 25 साल लगाए एक अरब डॉलर की कंपनी बनाने में। धैर्य और निरंतरता जरूरी है।

4. कर्मचारी सबसे बड़ी संपत्ति: वेम्बू अपने कर्मचारियों को परिवार मानते हैं। यही कारण है कि Zoho में टर्नओवर दर बहुत कम है।

5. समाज को वापस देना: सिर्फ पैसा कमाना काफी नहीं है। आपको समाज में योगदान भी देना चाहिए।

निजी जीवन

वेम्बू अपनी निजी जिंदगी को मीडिया से दूर रखते हैं। वे शादीशुदा हैं और उनका परिवार भी Zoho में शामिल है। उनकी बहन राधा वेम्बू और भाई सेकर वेम्बू कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं।

वे सादगी से रहते हैं। अरबों की संपत्ति के बावजूद वे गांव में एक साधारण घर में रहते हैं। उनका मानना है कि असली खुशी चीजों में नहीं, बल्कि काम और जीवन के उद्देश्य में है।

Zoho का भविष्य

आज Zoho दुनिया भर में लाखों कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी लगातार बढ़ रही है और नए प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रही है। वेम्बू का विजन है कि Zoho एक ऐसा प्लेटफॉर्म बने जहां किसी भी आकार की कंपनी को अपने बिज़नेस चलाने के लिए जरूरी सभी सॉफ्टवेयर मिलें।

कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में भी निवेश कर रही है। लेकिन वेम्बू की प्राथमिकता हमेशा ग्राहक और कर्मचारी रहते हैं, न कि सिर्फ तकनीक।

युवाओं के लिए सीख

श्रीधर वेम्बू की कहानी से युवा उद्यमियों को कई सीख मिलती है:

धैर्य रखें: सफलता रातोंरात नहीं मिलती। लगातार मेहनत और धैर्य जरूरी है।

अपने विजन पर कायम रहें: दुनिया कुछ और कहे, लेकिन अगर आपको अपने आइडिया पर भरोसा है तो उस पर टिके रहें।

पैसा सबकुछ नहीं है: फंडिंग मिलना जरूरी नहीं है। अच्छा बिज़नेस मॉडल और अच्छा प्रोडक्ट ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अपनी जड़ों को मत भूलो: सफल होने के बाद भी अपने समाज और देश के लिए कुछ करें।

कर्मचारियों का ख्याल रखें: आपकी सबसे बड़ी संपत्ति आपकी टीम है। उनका ख्याल रखें और उन्हें आजादी दें।

एक अलग तरह का अरबपति

श्रीधर वेम्बू आज के दौर के सबसे प्रेरणादायक उद्यमियों में से एक हैं। वे साबित करते हैं कि सफलता के कई रास्ते हैं। जरूरी नहीं कि आप सिलिकॉन वैली में रहें, वेंचर कैपिटल से फंडिंग लें, या मीडिया में छाए रहें। आप अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर भी सफल हो सकते हैं।

वेम्बू की कहानी हमें याद दिलाती है कि असली सफलता सिर्फ पैसा कमाने में नहीं, बल्कि एक अर्थपूर्ण जीवन जीने और समाज को कुछ देने में है। वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपने सपनों को पूरा किया, लेकिन अपनी जड़ों को नहीं भूले।

आज जब हर कोई तेजी से अमीर बनने की होड़ में है, वेम्बू हमें सिखाते हैं कि धीमी और स्थिर चाल भी दौड़ जीत सकती है। वे याद दिलाते हैं कि भारत की असली ताकत उसके गांवों में है और विकास सभी के लिए होना चाहिए, न कि सिर्फ शहरों के लिए।

श्रीधर वेम्बू सिर्फ एक सफल उद्यमी नहीं हैं। वे एक विचारक, एक समाज सुधारक, और एक ऐसे व्यक्ति हैं जो साबित करते हैं कि आप अपने तरीके से दुनिया बदल सकते हैं। उनकी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो कुछ अलग करना चाहता है, जो अपने सपनों को जीना चाहता है, और जो समाज के लिए कुछ करना चाहता है।

श्रीधर वेम्बू की जीवन यात्रा वास्तव में प्रेरणादायक है और युवा उद्यमियों के लिए एक मार्गदर्शक के समान है।

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